ज़रूरत से पहले सेव कर लें
इमरजेंसी कार्ड नंबर और प्राथमिक उपचार
एक टैप में इमरजेंसी नंबर, शांत और साफ़ प्राथमिक उपचार, और परिवार के संपर्क व ब्लड ग्रुप वाला फ़्रिज कार्ड। आपकी जानकारी इसी डिवाइस पर रहती है। पेज को ऑफ़लाइन के लिए सेव करें।
आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयास्रोत
प्राथमिक उपचार
पहले 112 या 108 पर कॉल करें। ये क़दम सिर्फ़ प्रशिक्षित मदद आने तक के लिए हैं।
108 या 112 पर कॉल करें और फ़ोन स्पीकर पर रखें। दो लोग हों तो एक कॉल करे, दूसरा शुरू करे।
- कंधे थपथपाकर ज़ोर से पुकारें। जवाब न मिले और सामान्य साँस न चले (हाँफना साँस नहीं है), तो तुरंत शुरू करें।
- उन्हें सख़्त ज़मीन पर पीठ के बल लिटाएँ। एक हथेली की एड़ी छाती के बीच में रखें, दूसरा हाथ उसके ऊपर।
- बाँहें सीधी रखकर ज़ोर से और तेज़ दबाएँ: लगभग 5 सेमी गहरा, एक मिनट में 100 से 120 बार। हर बार छाती को वापस ऊपर आने दें।
- मदद आने, साँस लौटने या AED (शॉक मशीन) तैयार होने तक न रुकें। ट्रेनिंग ली है तो हर 30 दबाव के बाद 2 साँस दें।
- ✕ नब्ज़ ढूँढने में समय न गँवाएँ।
- ✕ पानी न पिलाएँ, न झकझोरें।
अगर खाँस या बोल पा रहे हैं, तो खाँसने दें। तभी कुछ करें जब साँस, बोलना या खाँसना बंद हो।
- बड़े या 1 साल से बड़े बच्चे: आगे झुकाएँ और हथेली की एड़ी से कंधों के बीच 5 तक ज़ोरदार थपकियाँ दें।
- फिर 5 तक पेट पर झटके: पीछे खड़े होकर मुट्ठी नाभि के ठीक ऊपर रखें, तेज़ी से अंदर और ऊपर की ओर खींचें। थपकी और झटके दोहराएँ।
- 1 साल से छोटा बच्चा: अपनी बाँह पर औंधा लिटाएँ, सिर नीचे, पीठ पर 5 थपकियाँ; फिर सीधा लिटाकर छाती की हड्डी पर दो उँगलियों से 5 दबाव।
- अगर बेहोश हो जाएँ तो 112 पर कॉल करें और CPR शुरू करें।
- ✕ बिना देखे मुँह में उँगली न डालें।
- ✕ 1 साल से छोटे बच्चे के पेट पर झटके न दें।
तुरंत एंटी-स्नेक वेनम वाले अस्पताल जाएँ; 108 पर कॉल करें। समय पर पहुँचें तो ज़्यादातर मामलों में इलाज हो जाता है।
- हिम्मत बँधाएँ: व्यक्ति को शांत और स्थिर रखें। कई साँप ज़हरीले नहीं होते।
- काटे हुए अंग को हड्डी टूटने की तरह ढीला बाँधकर स्थिर करें। अँगूठी, चूड़ी और तंग कपड़े उतार दें।
- बिना देर अस्पताल पहुँचें, हो सके तो लेटकर। डॉक्टर को काटने का समय और लक्षण (पलकें झुकना, ख़ून बहना, साँस में तकलीफ़) बताएँ।
- ✕ कसकर पट्टी न बाँधें, चीरा न लगाएँ, ज़हर न चूसें, बर्फ़ न लगाएँ।
- ✕ ओझा या झाड़-फूँक के पास न जाएँ: इससे जान बचाने का क़ीमती समय बर्बाद होता है।
- ✕ साँप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
गर्मी में त्वचा गरम होना, भ्रम, बेहोशी या दौरे पड़ना इमरजेंसी है: 108 पर कॉल करें और तुरंत ठंडक पहुँचाएँ।
- छाया या ठंडे कमरे में ले जाएँ। कपड़े ढीले करें, फ़ालतू कपड़े उतारें।
- जल्दी ठंडा करें: त्वचा पर पानी डालकर पंखा करें, या गर्दन, बगल और जाँघों के जोड़ पर ठंडे गीले कपड़े या बर्फ़ की थैली रखें।
- सिर्फ़ पूरी तरह होश में हों, तभी पानी या ORS घूँट-घूँट दें।
- ✕ नींद में या भ्रमित हों तो मुँह से कुछ न दें।
- ✕ उन्हें अकेला न छोड़ें।
जलना रोकें: आग बुझाएँ ("रुको, लेटो, लुढ़को"), किसी को छूने से पहले बिजली बंद करें।
- जले हुए हिस्से को लगभग 20 मिनट तक नल के ठंडे बहते पानी में रखें।
- जले हिस्से के पास की अँगूठी, घड़ी और कपड़े हटा दें, जब तक वे चिपके न हों।
- साफ़ क्लिंग फ़िल्म या साफ़, बिना रोएँ वाले कपड़े से ढीला ढकें। बाक़ी शरीर को गरम रखें।
- हथेली से बड़े, चेहरे, हाथ, पैर या गुप्तांग पर, बिजली या केमिकल से जलने पर, और बच्चों या बुज़ुर्गों के जलने पर डॉक्टर को दिखाएँ।
- ✕ बर्फ़, मक्खन, तेल, टूथपेस्ट, स्याही या घरेलू लेप न लगाएँ।
- ✕ छाले न फोड़ें, चिपके कपड़े न खींचें।
रेबीज़ जानलेवा है पर पूरी तरह रोका जा सकता है। अभी घाव धोएँ और आज ही डॉक्टर को दिखाएँ।
- घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट धोएँ।
- हो तो पोविडोन-आयोडीन जैसा एंटीसेप्टिक लगाएँ। घाव खुला छोड़ दें।
- उसी दिन सरकारी अस्पताल या PHC में एंटी-रेबीज़ टीका लगवाएँ (सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त), खरोंच से ख़ून निकला हो तब भी।
- ✕ घाव पर मिर्च, हल्दी, चूना, तेल या मिट्टी न लगाएँ।
- ✕ टीका शुरू करने से पहले "कुत्ते पर नज़र रखने" का इंतज़ार न करें।
सभी हेल्पलाइन
यह कैसे काम करता है
- किसी भी इमरजेंसी में पहले 112 (पुलिस, फ़ायर, एम्बुलेंस) या 108 (एम्बुलेंस) पर कॉल करें। प्राथमिक उपचार सिर्फ़ मदद आने तक के लिए है।
- प्राथमिक उपचार के क़दम WHO की जलने और रेबीज़ की जानकारी, भारत सरकार के साँप काटने के प्रोटोकॉल ("Do it R.I.G.H.T."), अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के हैंड्स-ओनली CPR और भारतीय प्राथमिक चिकित्सा पुस्तिका पर आधारित हैं। इन्हें जान-बूझकर छोटा रखा गया है।
- आपके संपर्क, ब्लड ग्रुप, एलर्जी और दवाइयाँ सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में सेव होती हैं। फ़्रिज कार्ड की PDF आपके डिवाइस पर ही बनती है।
- अच्छे नेटवर्क पर एक बार "ऑफ़लाइन के लिए सेव करें" दबाएँ: फिर यह पेज बिना इंटरनेट खुलेगा।
लोग पूछते हैं
भारत में इमरजेंसी नंबर क्या है?
112 पूरे भारत में पुलिस, फ़ायर और एम्बुलेंस का एक ही इमरजेंसी नंबर है, किसी भी फ़ोन से। ज़्यादातर राज्यों में एम्बुलेंस के लिए 108 है। पुलिस के लिए 100 और फ़ायर के लिए 101 अब भी लगते हैं।
ऑनलाइन ठगी में पैसा गया तो क्या करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें, हो सके तो पहले घंटे में, या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। जल्दी शिकायत से बैंक पैसा आगे जाने से पहले रोक सकते हैं।
साँप काटने पर कसकर पट्टी बाँधना ठीक है?
नहीं। भारत का साँप काटने का प्रोटोकॉल कसकर पट्टी, चीरा, ज़हर चूसने और बर्फ़ से मना करता है। व्यक्ति को शांत और स्थिर रखें, अंग को ढीला बाँधकर स्थिर करें, और जल्दी एंटी-स्नेक वेनम वाले अस्पताल पहुँचें।
क्या यह पेज बिना इंटरनेट चलता है?
हाँ, एक बार "ऑफ़लाइन के लिए सेव करें" दबाने के बाद। नंबर और प्राथमिक उपचार पेज में ही हैं। कॉल करने के लिए डेटा नहीं चाहिए।
स्रोत
आखिरी बार जाँचा गया:
- Emergency Response Support System (112), Ministry of Home Affairs
- National Cyber Crime Reporting Portal (1930)
- Tele-MANAS (14416), Ministry of Health and Family Welfare
- Elderline 14567 (PIB)
- WHO: Burns fact sheet (cool running water about 20 minutes; nothing else on the burn)
- WHO: Rabies fact sheet (wash for at least 15 minutes, post-exposure vaccine)
- National Snakebite Management Protocol, DGHS/MoHFW ("Do it R.I.G.H.T.")
- American Heart Association: hands-only CPR
- Indian First Aid Manual 2016, Indian Red Cross Society and St John Ambulance
- NDMA: heat wave guidance