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टैक्स वर्ष 2026-27

इनकम टैक्स कैलकुलेटर पुरानी बनाम नई व्यवस्था

1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की कमाई पर दोनों व्यवस्थाओं में कितना टैक्स बनेगा, छूट, मार्जिनल रिलीफ़, सरचार्ज और सेस समेत, एक-एक लाइन में देखें। आप जो भरते हैं वह इसी फ़ोन या कंप्यूटर पर रहता है।

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दोनों व्यवस्थाएँ साथ-साथ देखने के लिए अपनी सैलरी या आय भरें।

नई व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट)

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पुरानी व्यवस्था

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यह योजना बनाने के लिए अनुमान है। असली हिसाब आपकी कंपनी का TDS, फ़ॉर्म 16 और ई-फ़ाइलिंग पोर्टल के आँकड़े हैं। कैपिटल गेन, कारोबार की आय या किसी ख़ास मामले में CA से बात करें।

ITR के लिए काग़ज़ों की सूची

जो आप पर लागू हो उस पर टिक करें। सूची और सही ITR फ़ॉर्म साथ-साथ बदलते हैं। प्रिंट करें या फ़ाइल करते समय खुला रखें।

संभावित फ़ॉर्म: ITR-1 टैक्स वर्ष 2026-27 के फ़ॉर्म 2027 की शुरुआत में जारी होंगे; नए क़ानून में नाम बदल सकते हैं।

यह कैसे काम करता है

  • स्लैब, स्टैंडर्ड डिडक्शन, छूट और सरचार्ज आयकर अधिनियम 2025 (1 अप्रैल 2026 से लागू) और वित्त विधेयक 2026 के ज्ञापन से लिए गए हैं। बजट 2026 में दरें नहीं बदलीं।
  • नई व्यवस्था (धारा 202, डिफ़ॉल्ट): ₹4 लाख तक कोई टैक्स नहीं, फिर 5% से 30% तक। नौकरीपेशा लोगों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, और धारा 156 की छूट से ₹12 लाख तक की टैक्स योग्य आय पर टैक्स शून्य हो जाता है।
  • पुरानी व्यवस्था (धारा 202(4) के तहत चुनने पर): ₹2.5 लाख तक छूट, 60 साल पर ₹3 लाख और 80 साल पर ₹5 लाख, ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन, ₹5 लाख तक ₹12,500 की छूट, और धारा 123 (पुराना 80C), हेल्थ इंश्योरेंस, होम लोन ब्याज, NPS जैसी कटौतियाँ।
  • टैक्स योग्य आय और टैक्स को नज़दीकी ₹10 तक गोल किया जाता है। ख़ास दर वाले कैपिटल गेन, कारोबार की आय और NRI इसमें शामिल नहीं हैं; उनके लिए CA या ई-फ़ाइलिंग पोर्टल देखें।

लोग पूछते हैं

क्या 2026-27 में ₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ़्री है?

नई व्यवस्था में, भारत में रहने वाले व्यक्ति के लिए हाँ। टैक्स योग्य आय ₹12 लाख या उससे कम हो तो धारा 156 की ₹60,000 तक की छूट पूरा टैक्स ख़त्म कर देती है। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर टैक्स नहीं लगता। ज़्यादातर कैपिटल गेन जैसी ख़ास दर वाली आय पर यह छूट नहीं मिलती।

₹12 लाख से थोड़ा ऊपर मार्जिनल रिलीफ़ क्या है?

अगर आय ₹12 लाख से थोड़ी ही ज़्यादा है, तो टैक्स उस रकम से ज़्यादा नहीं होगा जितनी आय ₹12 लाख से ऊपर है। जैसे ₹12.1 लाख पर टैक्स ₹10,000 और सेस बनेगा, ₹61,500 नहीं। यह राहत लगभग ₹12.7 लाख पर ख़त्म हो जाती है।

कौन सी व्यवस्था चुनें?

बिना होम लोन वाले ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए नई व्यवस्था सस्ती पड़ती है। अगर HRA, धारा 123 के निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस, होम लोन ब्याज और NPS की कटौतियाँ बड़ी हैं तो पुरानी व्यवस्था फ़ायदेमंद हो सकती है। कैलकुलेटर बताता है कि कितनी कटौतियों पर दोनों बराबर हो जाती हैं।

आयकर अधिनियम 2025 से क्या बदला?

1 अप्रैल 2026 से 1961 का क़ानून बदल गया है। "पिछला वर्ष" और "आकलन वर्ष" की जगह अब एक "टैक्स वर्ष" है, और धाराओं के नंबर बदले हैं: 87A अब 156 है, 80C अब 123, 80D अब 126 और 115BAC अब 202। 2026-27 की दरें वही हैं।

2026-27 का रिटर्न कब तक भरना है?

2026-27 का रिटर्न अप्रैल 2027 से भरा जाएगा। ITR-1 और ITR-2 की आख़िरी तारीख़ 31 जुलाई 2027 है; वित्त विधेयक 2026 ने बिना ऑडिट वाले कारोबार और पेशे के मामलों की तारीख़ 31 अगस्त कर दी है। अंतिम तारीख़ें ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर ज़रूर देखें।

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