कालसर्प योग · पूर्ण, आंशिक या नहीं · 12 प्रकार · निजी
कालसर्प जाँच
कालसर्प दोष (योग) तब माना जाता है जब सूर्य से शनि तक सातों ग्रह राहु-केतु अक्ष के एक ओर हों। यह बाद की धारणा है; बृहत पाराशर होरा शास्त्र जैसे शास्त्रीय ग्रंथों में इसका ज़िक्र नहीं है। देखें कि आपकी कुंडली में यह पूर्ण, आंशिक है या नहीं, और इसे कितना महत्व दें।
आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयाजवाब के नियम ज्योतिषी योगिराज कावळे द्वारा जाँचे गए
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र जैसे शास्त्रीय ग्रंथों में कालसर्प का ज़िक्र नहीं है, और बहुत से ज्योतिषी इसे नहीं मानते।
कालसर्प दोष कैसे देखें?
- जन्म तिथि, समय और स्थान डालें (या सेव प्रोफ़ाइल लें)।
- "कालसर्प जाँचें" दबाएँ।
- राहु-केतु का घेरा, परिणाम और प्रकार देखें।
राहु और केतु वे दो बिंदु हैं जहाँ चंद्रमा का पथ सूर्य के पथ को काटता है। ये हमेशा ठीक आमने-सामने रहते हैं, इसलिए बहुत सी साधारण कुंडलियों में सातों ग्रह एक ओर होते हैं, और राशि की ढीली गिनती से और भी ज़्यादा। यह एक स्थिति है, श्राप नहीं।
कालसर्प दोष: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कालसर्प दोष क्या है?
कहा जाता है कि कालसर्प तब बनता है जब सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि सब राहु से केतु तक के आधे राशिचक्र में हों। इसका प्रकार (अनंत, कुलिक, वासुकी आदि) राहु के भाव से तय होता है।
आंशिक कालसर्प क्या है?
जब एक ग्रह राहु-केतु के घेरे से बाहर हो, या राशि से सब अंदर हों पर एक ग्रह अंशों में पार हो। कुछ ज्योतिषी इसे आंशिक कहते हैं; बहुत से गिनते ही नहीं। हम इसे साफ़ अलग दिखाते हैं।
क्या कालसर्प शास्त्रों में है?
नहीं। यह बृहत् पाराशर होरा शास्त्र या दूसरे बड़े शास्त्रीय ग्रंथों में नहीं है; पिछली सदी में प्रचलित हुआ। इसीलिए हम इसे एक स्थिति के रूप में दिखाते हैं, फ़ैसले के रूप में नहीं।
कालामृत क्या है?
कुछ ज्योतिषी दिशा देखते हैं: ग्रह राहु से केतु की ओर (कालसर्प) या केतु से राहु की ओर (कालामृत), और दूसरे को नरम मानते हैं। आपकी कुंडली में कौन सी दिशा है, हम दिखाते हैं।
क्या कालसर्प पूजा करानी चाहिए?
हम कोई अनुष्ठान न सुझाते हैं न बेचते हैं। बहुत से सफल लोगों की कुंडली में यह स्थिति है। चिंता हो तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें; महँगे अनुष्ठानों की ज़रूरत नहीं।