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गोचर 2027 · सभी 12 चंद्र राशियाँ

राहु-केतु गोचर 2027

राहु और केतु असली ग्रह नहीं हैं। ये वे दो बिंदु हैं जहाँ चंद्रमा का रास्ता सूर्य के रास्ते को काटता है, और ये हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने रहते हैं। राहु भूख, नई और अलग चीज़ों का; केतु छोड़ने, वैराग्य और अंदर के जीवन का प्रतीक है। राहु और केतु हर राशि में लगभग डेढ़ साल रहते हैं और हमेशा उलटी दिशा में चलते हैं।

आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गया

2027 में कहाँ चलेगा

ग्रहराशि2027 मेंपूरा ठहराव
राहुमकरपूरा साल5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक
केतुकर्कपूरा साल5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक

वक्री होने का समय

  • राहु और केतु हमेशा उलटी दिशा में चलते हैं, इसलिए इनका अलग से वक्री समय नहीं होता।

आपकी चंद्र राशि के लिए

हर राशि के लिए 2027 में भाव, चंद्र राशि से गिनकर। पूरा मतलब, तारीख़ें और आसान कदम देखने के लिए अपनी राशि खोलें।

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संतुलन से देखें

  • राहु और केतु जिस भाव में हों, उसे बड़ा कर देते हैं। ये सज़ा नहीं देते। सही दिशा में, राहु की भूख महत्वाकांक्षा बनती है और केतु का वैराग्य शांति।
  • 2027 में राहु मकर में है, जो शनि की राशि है। कई ज्योतिषी मानते हैं कि शनि की राशियों में राहु ज़्यादा स्थिर रहता है।
  • यह गोचर कालसर्प दोष नहीं है। कालसर्प सिर्फ़ जन्म कुंडली से देखा जाता है, और वहाँ भी अक्सर रद्द हो जाता है।
  • सबसे ज़्यादा आपकी अपनी दशा (जीवन में चल रही ग्रह की अवधि) मायने रखती है। अगर राहु या केतु की दशा नहीं चल रही, तो यह गोचर अक्सर हल्का रहता है।

अपनी कुंडली में देखें

यह पेज सिर्फ़ आपकी चंद्र राशि से गिनता है, जैसे राशिफल में होता है। पूरी कुंडली में आपका लग्न, आपकी दशा और वेध की जाँच भी जुड़ती है। यह आपके फ़ोन पर चलती है; आपकी जन्म जानकारी कहीं नहीं जाती।

ये तारीख़ें कैसे निकाली गईं

ग्रह स्थिति निरयण (लाहिड़ी अयनांश) है, मध्यम राहु-केतु के साथ, उसी इंजन से जो हमारे पंचांग और कुंडली में चलता है। राशि बदलने और वक्री-मार्गी होने का समय एक मिनट तक सही निकाला गया है और IST की तारीख़ों में दिखाया गया है। भाव चंद्र राशि से पूरी राशि के हिसाब से गिने गए हैं।

राहु-केतु गोचर 2027: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में राहु-केतु कब राशि बदलेगा?

मकर: 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक। केतु: कर्क पूरा साल।

2027 में राहु-केतु कब वक्री है?

राहु और केतु हमेशा उलटी दिशा में चलते हैं, इसलिए इनका अलग से वक्री समय नहीं होता। वक्री: पृथ्वी से देखने पर ग्रह कुछ महीने उलटा चलता दिखता है। असल में वह पीछे नहीं जाता। परंपरा में यह नया शुरू करने की जगह दोबारा देखने और पूरा करने का समय माना जाता है।

क्या मुझे कोई उपाय करना होगा?

नहीं। कोई महँगी पूजा या रत्न ज़रूरी नहीं। रूटीन, मेहनत और दूसरों की मदद सबसे भरोसेमंद कदम हैं, और आपकी अपनी कुंडली की दशा ज़्यादा मायने रखती है।

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