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आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर)

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) राज्य सरकार की योजना है। जिन परिवारों का कमाने वाला सदस्य आतंकवाद में मारा गया या अपाहिज हुआ, उनकी विधवाओं, बुज़ुर्गों और दिव्यांगों को मासिक पेंशन, साथ में शादी सहायता, अनाथ बच्चों को वज़ीफ़ा और मोटर ट्राइसाइकिल। आवेदन मुफ़्त है: doda.nic.in या नज़दीकी CSC पर।

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क्या मिलता हैराशि आधिकारिक साइट पर देखें
कहाँजम्मू और कश्मीर (राज्य सरकार)
कौन चलाता हैSocial Welfare Department (J&K State Rehabilitation Council), Govt of Jammu and Kashmir
आख़िरी जाँच1 नवंबर 2026

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) में क्या मिलता है?

जिन परिवारों का कमाने वाला सदस्य आतंकवाद में मारा गया या अपाहिज हुआ, उनकी विधवाओं, बुज़ुर्गों और दिव्यांगों को मासिक पेंशन, साथ में शादी सहायता, अनाथ बच्चों को वज़ीफ़ा और मोटर ट्राइसाइकिल।

राशि अप्रैल 2021 के ज़िला पेज से है, ताज़ा राशि ज़िला समाज कल्याण अधिकारी से पक्की कर लें।

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) के लिए कौन पात्र है?

  • जम्मू-कश्मीर के वे परिवार जिनका कमाने वाला सदस्य आतंकवाद में मारा गया या अपाहिज हुआ।
  • विधवा, बुज़ुर्ग और दिव्यांग को ₹1,000 महीना पेंशन।
  • युवा विधवा और बड़ी बेटियों की शादी पर एक बार ₹40,000।
  • अनाथ बच्चों को ₹750 महीना वज़ीफ़ा।

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

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राज्य या दफ़्तर और कागज़ माँग सकते हैं। आधिकारिक सूची देखें।

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) के लिए आवेदन कैसे करें?

  1. ज़िला समाज कल्याण अधिकारी से मिलें और कमाने वाले सदस्य की मौत या विकलांगता आतंकवाद से होने का प्रमाण दें।
  2. जिस लाभ की ज़रूरत है (पेंशन, शादी सहायता, वज़ीफ़ा या ट्राइसाइकिल) उसका फ़ॉर्म भरें और माँगे गए काग़ज़ लगाएँ।

आधिकारिक साइट पर जाएँ ↗

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) का स्टेटस कैसे देखें?

  1. ज़िला समाज कल्याण अधिकारी से पूछें, पेंशन बैंक खाते में आती है।

कोई कॉल या मैसेज OTP माँगे तो न बताएँ। सरकारी पोर्टल का पता .gov.in पर ख़त्म होता है।

आम सवाल

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) के लिए कौन पात्र है?

जम्मू-कश्मीर के वे परिवार जिनका कमाने वाला सदस्य आतंकवाद में मारा गया या अपाहिज हुआ। विधवा, बुज़ुर्ग और दिव्यांग को ₹1,000 महीना पेंशन। युवा विधवा और बड़ी बेटियों की शादी पर एक बार ₹40,000। अनाथ बच्चों को ₹750 महीना वज़ीफ़ा।

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) में कितना मिलता है?

जिन परिवारों का कमाने वाला सदस्य आतंकवाद में मारा गया या अपाहिज हुआ, उनकी विधवाओं, बुज़ुर्गों और दिव्यांगों को मासिक पेंशन, साथ में शादी सहायता, अनाथ बच्चों को वज़ीफ़ा और मोटर ट्राइसाइकिल। राशि अप्रैल 2021 के ज़िला पेज से है, ताज़ा राशि ज़िला समाज कल्याण अधिकारी से पक्की कर लें।

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए?

कमाने वाले सदस्य का मृत्यु प्रमाण पत्र; FIR या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी; राज्य का मूल निवास / निवास प्रमाण पत्र; आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से जुड़ा); बैंक पासबुक या खाते का विवरण (आधार से जुड़ा खाता); पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो; दिव्यांगता प्रमाण पत्र या UDID कार्ड; उम्र का प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र आदि)।

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) के लिए आवेदन कैसे करें?

ज़िला समाज कल्याण अधिकारी से मिलें और कमाने वाले सदस्य की मौत या विकलांगता आतंकवाद से होने का प्रमाण दें। जिस लाभ की ज़रूरत है (पेंशन, शादी सहायता, वज़ीफ़ा या ट्राइसाइकिल) उसका फ़ॉर्म भरें और माँगे गए काग़ज़ लगाएँ। आधिकारिक साइट: https://doda.nic.in/scheme/schemes-of-state-rehabilitation-council-for-militancy-victims/

आतंकवाद पीड़ितों के लिए राज्य पुनर्वास परिषद की योजनाएँ (जम्मू और कश्मीर) का स्टेटस कैसे देखें?

ज़िला समाज कल्याण अधिकारी से पूछें, पेंशन बैंक खाते में आती है।

क्या आवेदन के लिए किसी को पैसे देने होंगे?

नहीं। आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन मुफ़्त है। CSC पर सिर्फ़ तय सेवा शुल्क लग सकता है। मंज़ूरी का वादा करने वाले एजेंट को पैसे न दें।

स्रोत

आख़िरी जाँच 1 नवंबर 2026। नियम और राशि बदलते रहते हैं, आवेदन से पहले आधिकारिक साइट देखें। IndiaDigital एक स्वतंत्र साइट है, सरकारी नहीं।

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