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डिजिटल अरेस्ट स्कैम: यह क्या है और ऐसी कॉल आए तो क्या करें

IndiaDigital संपादक3 मिनटRead in English

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट ठगों की बनाई कहानी है। कोई ख़ुद को CBI, ED, पुलिस, कस्टम, TRAI या अदालत का अधिकारी बताकर कॉल करता है। वह कहता है कि आपके नाम के पार्सल, सिम, आधार या बैंक खाते का संबंध ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या मनी लॉन्ड्रिंग से है। फिर कहा जाता है कि आप “डिजिटल अरेस्ट” में हैं: वीडियो कॉल चालू रखिए, कमरे से बाहर मत जाइए और किसी को मत बताइए।

भारतीय क़ानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं है। गिरफ़्तारी आमने-सामने, क़ानूनी प्रक्रिया से होती है। असली एजेंसियाँ लिखित नोटिस भेजती हैं, WhatsApp या Skype पर पूछताछ नहीं करतीं और “जाँच” के नाम पर पैसे कभी नहीं माँगतीं।

ध्यान देंआप किसी भी समय कॉल काट सकते हैं। फ़ोन काटना अपराध नहीं है और स्क्रीन के ज़रिए कोई आपको गिरफ़्तार नहीं कर सकता।

यह ठगी कैसे होती है?

  1. एक ऑटोमैटिक कॉल कहती है कि TRAI आपका नंबर दो घंटे में बंद कर देगा, या कूरियर कंपनी कहती है कि आपके नाम का पार्सल पकड़ा गया है।
  2. वीडियो पर वर्दी में कोई “अधिकारी” आता है, कभी नकली आईडी कार्ड या गिरफ़्तारी वारंट WhatsApp पर भेजता है।
  3. आपसे कहा जाता है कि मामला गुप्त है, परिवार को बताया तो मुश्किल बढ़ेगी, और कैमरा चालू रखना है। यह घंटों या दिनों तक चल सकता है।
  4. “बेगुनाही साबित करने” के लिए बचत, FD या लोन की रक़म किसी “सेफ़” या “RBI वेरिफ़िकेशन” खाते में भेजने को कहा जाता है।
  5. पैसा कुछ ही मिनटों में कई खातों में बँट जाता है और “अधिकारी” ग़ायब हो जाते हैं।

डिजिटल अरेस्ट कॉल आए तो क्या करें?

स्थितिक्या करें
कॉल चल रही हैफ़ोन काटिए। आधार, PAN, बैंक जानकारी या OTP मत बताइए। उनका बताया कोई ऐप इंस्टॉल मत कीजिए।
डर है कि केस असली हो सकता हैख़ुद ढूँढे नंबर से अपने नज़दीकी थाने में या 112 पर पूछिए। कॉलर का दिया नंबर कभी मत लीजिए।
पैसे भेज दिए हैंतुरंत 1930 पर कॉल कीजिए, हर ट्रांज़ैक्शन आईडी (UTR) के साथ cybercrime.gov.in पर शिकायत कीजिए, फिर बैंक को बताइए।
कोई पैसा नहीं गयानंबर चक्षु (sancharsaathi.gov.in/sfc) पर रिपोर्ट कीजिए, ब्लॉक कीजिए और परिवार को सावधान कीजिए।
शक है? स्कैम चेकर में जाँचिएकॉल में क्या कहा गया, लिखिए और ख़तरे के संकेत देखिएखोलें →

ठगी पहचानने के संकेत

  • “डिजिटल अरेस्ट” या “ऑनलाइन कस्टडी” जैसे शब्द।
  • आपके नाम का ऐसा पार्सल जो आपने कभी भेजा ही नहीं।
  • परिवार को न बताने और कैमरा चालू रखने का दबाव।
  • किसी “सेफ़” या “वेरिफ़िकेशन” खाते में पैसे भेजने की माँग।
  • अनजान या विदेशी नंबर, पुलिस या CBI के लोगो वाली प्रोफ़ाइल फ़ोटो।

सुझावबुज़ुर्ग माता-पिता को एक नियम सिखाइए: कोई असली अधिकारी कॉल पर पैसे नहीं माँगता। कोई माँगे तो फ़ोन काटकर पहले परिवार के किसी सदस्य को कॉल कीजिए।

पैसे चले गए तो क्या करें?

सबसे ज़रूरी है जल्दी करना। जल्दी रिपोर्ट से बैंक पैसा अगले खाते में जाने से पहले रोकने की कोशिश कर पाते हैं। ट्रांज़ैक्शन आईडी, रक़म, समय, जिन खातों या UPI आईडी में पैसा गया, फ़ोन नंबर और चैट के स्क्रीनशॉट संभालकर रखिए। 1930 और cybercrime.gov.in के बाद थाने या साइबर सेल में लिखित शिकायत भी दीजिए।

ध्यान देंपैसा वापस दिलाने के नाम पर फ़ीस माँगने वाले “रिकवरी एजेंट” भी ठग होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या भारत में डिजिटल अरेस्ट क़ानूनी है?

नहीं। भारतीय क़ानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस आमने-सामने क़ानूनी प्रक्रिया से गिरफ़्तार करती है और कोई एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं माँगती।

क्या CBI या पुलिस WhatsApp पर कॉल कर सकती है?

एजेंसियाँ संपर्क कर सकती हैं, लेकिन WhatsApp या Skype पर पूछताछ नहीं करतीं, वीडियो पर वारंट नहीं दिखातीं और पैसे कभी नहीं माँगतीं। ख़ुद ढूँढे नंबर से थाने में पुष्टि कीजिए।

डिजिटल अरेस्ट ठगी के बाद किस नंबर पर कॉल करें?

जितनी जल्दी हो सके 1930 पर कॉल कीजिए और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए। फिर कार्ड पर छपे नंबर से बैंक को बताइए ताकि आगे के ट्रांसफ़र रुकें।

मैंने पैसे नहीं दिए, फिर भी रिपोर्ट करूँ?

हाँ। पिछले 30 दिनों की ऐसी कॉल और मैसेज चक्षु (sancharsaathi.gov.in/sfc) पर रिपोर्ट कीजिए। इससे ठगों के नंबर बंद करने में मदद मिलती है।

स्रोत

आख़िरी जाँच: . नियम और तारीख़ें बदलती रहती हैं। कोई कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पक्का कर लें।

यह लेख सामान्य सुरक्षा जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। हेल्पलाइन, पोर्टल और बैंक के नियम बदल सकते हैं: अपने बैंक, पुलिस और cybercrime.gov.in के निर्देश मानिए।

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