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साइबर ठगी हो गई? पहले एक घंटे में क्या करें (1930 चेकलिस्ट)

IndiaDigital संपादक3 मिनटRead in English

ठगी के बाद पहले घंटे में क्या करें

  1. 1930 पर कॉल करके ठगी की जानकारी दीजिए और शिकायत संख्या लिख लीजिए।
  2. cybercrime.gov.in पर UTR या ट्रांज़ैक्शन आईडी, रक़म, समय और जिन खातों या UPI आईडी में पैसा गया, उनके साथ शिकायत दर्ज कीजिए।
  3. कार्ड पर छपे नंबर या बैंक ऐप से बैंक को कॉल कीजिए और ज़रूरत हो तो कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाइए।
  4. चैट, SMS, कॉल लॉग और पेमेंट स्क्रीन के स्क्रीनशॉट लीजिए। कुछ भी डिलीट मत कीजिए।
  5. किसी सुरक्षित डिवाइस से पासवर्ड बदलिए और ठग के कहने पर डाला गया कोई भी ऐप हटाइए।
  6. थाने या साइबर सेल में लिखित शिकायत दीजिए और ठगों के नंबर चक्षु पर रिपोर्ट कीजिए।

साइबर ठगी हो गई तो सबसे पहले क्या करें?

1930 पर कॉल कीजिए। यह गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के साथ चलने वाली राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन है। जल्दी रिपोर्ट करने पर शिकायत संबंधित बैंकों और वॉलेट तक पहुँचती है, ताकि वे पैसा अगले खाते में जाने से पहले रोकने की कोशिश कर सकें।

लाइन व्यस्त हो तो कोशिश करते रहिए और इस बीच cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कीजिए। दोनों काम कीजिए: कॉल से प्रक्रिया जल्दी शुरू होती है और ऑनलाइन शिकायत से पूरा लिखित रिकॉर्ड बनता है।

ध्यान दें“शायद पैसा वापस आ जाए” सोचकर इंतज़ार मत कीजिए और ठग से बात मत करते रहिए। हर मिनट उन्हें पैसा आगे भेजने का समय देता है।

शिकायत के लिए कौन-सी जानकारी चाहिए?

जानकारीकहाँ मिलेगी
ट्रांज़ैक्शन आईडी या UTR नंबरUPI ऐप की ट्रांज़ैक्शन डिटेल, बैंक SMS या स्टेटमेंट
रक़म, तारीख़ और सही समयवही ट्रांज़ैक्शन स्क्रीन या SMS
जिस खाते या UPI आईडी में पैसा गयाUPI या बैंक ऐप की ट्रांज़ैक्शन डिटेल
ठग के फ़ोन नंबर, WhatsApp या Telegram नामकॉल लॉग और चैट
चैट और पेमेंट स्क्रीन के स्क्रीनशॉटअभी ले लीजिए, चैट डिलीट होने से पहले
कुछ ही मिनट में लिखित शिकायत बनाइएट्रांज़ैक्शन एक बार भरिए और पुलिस के लिए तैयार शिकायत डाउनलोड कीजिएखोलें →

बैंक को कब और कैसे बताएँ?

1930 के तुरंत बाद डेबिट कार्ड पर छपे नंबर या बैंक के आधिकारिक ऐप से बैंक को कॉल कीजिए। सर्च रिज़ल्ट या सोशल मीडिया पर मिला “कस्टमर केयर” नंबर कभी मत लीजिए। कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाइए, हर ट्रांज़ैक्शन की शिकायत संख्या लीजिए और बाद में लिखित में भी बताइए।

RBI के नियमों के अनुसार, जब ग़लती न ग्राहक की हो न बैंक की, तब तीन कामकाजी दिनों के भीतर रिपोर्ट करने पर ग्राहक की ज़िम्मेदारी सीमित रहती है। देर करने से नुक़सान आपके ऊपर ज़्यादा आ सकता है, इसलिए उसी दिन रिपोर्ट कीजिए।

फ़ोन और खाते कैसे सुरक्षित करें?

  • ठग के कहने पर AnyDesk, TeamViewer या कोई APK ऐप डाला हो तो एयरप्लेन मोड चालू करके उसे हटाइए।
  • किसी दूसरे सुरक्षित डिवाइस से नेट बैंकिंग, ईमेल और UPI ऐप के पासवर्ड बदलिए।
  • ठगी से पहले फ़ोन का सिग्नल अचानक चला गया था तो मोबाइल ऑपरेटर को कॉल कीजिए, यह सिम स्वैप हो सकता है।
  • ट्रांज़ैक्शन अलर्ट चालू रखिए और कुछ समय के लिए UPI और कार्ड की दैनिक सीमा कम कर दीजिए।

पुलिस शिकायत और चक्षु रिपोर्ट

cybercrime.gov.in की शिकायत मुख्य रिकॉर्ड है, लेकिन थाने या साइबर सेल में लिखित शिकायत उसे मज़बूत करती है। शिकायत संख्या, ट्रांज़ैक्शन की सूची और स्क्रीनशॉट साथ ले जाइए। फिर ठगी में इस्तेमाल हुए नंबर, SMS और WhatsApp मैसेज चक्षु (sancharsaathi.gov.in/sfc) पर रिपोर्ट कीजिए। चक्षु पिछले 30 दिनों की संदिग्ध कॉल और मैसेज लेता है, भले ही पैसा न गया हो।

ध्यान देंठगी के बाद पैसा वापस दिलाने के नाम पर फ़ीस माँगने वाले “रिकवरी एजेंट” या “साइबर पुलिस” भी ठग होते हैं। असली पुलिस पैसा वापस दिलाने की फ़ीस नहीं लेती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1930 क्या है?

1930 भारत की राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन है, जहाँ ऑनलाइन वित्तीय ठगी की रिपोर्ट की जाती है। जल्दी कॉल करने से शिकायत बैंकों तक पहुँचती है और वे पैसा रोकने की कोशिश कर पाते हैं।

क्या साइबर ठगी की शिकायत ऑनलाइन कर सकते हैं?

हाँ। गृह मंत्रालय के पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए और ट्रांज़ैक्शन आईडी, रक़म, समय और पैसा पाने वाले खाते या UPI आईडी की जानकारी जोड़िए।

बैंक को कितनी जल्दी बताना चाहिए?

तुरंत, हो सके तो उसी दिन। RBI के नियमों के अनुसार, जब ग़लती न आपकी हो न बैंक की, तब तीन कामकाजी दिनों में रिपोर्ट करने से आपकी ज़िम्मेदारी सीमित रहती है।

क्या 1930 पर कॉल करने से पैसा वापस मिल जाएगा?

इसकी कोई गारंटी नहीं है। पैसा वापस मिलना इस पर निर्भर करता है कि रिपोर्ट कितनी जल्दी हुई और पैसा अभी रोका जा सकता है या नहीं। पहले घंटे में रिपोर्ट करने से सबसे अच्छी संभावना रहती है।

स्रोत

आख़िरी जाँच: . नियम और तारीख़ें बदलती रहती हैं। कोई कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पक्का कर लें।

यह लेख सामान्य सुरक्षा जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। हेल्पलाइन, पोर्टल और बैंक के नियम बदल सकते हैं: अपने बैंक, पुलिस और cybercrime.gov.in के निर्देश मानिए।

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