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किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) फ़ॉर्मेट: 11 महीने, ज़रूरी शर्तें, स्टांप पेपर और रजिस्ट्रेशन

IndiaDigital संपादक4 मिनटRead in English

किरायानामा में क्या-क्या लिखा होना चाहिए?

किरायानामा मकान मालिक और किरायेदार के बीच लिखित अनुबंध है। बैंक, गैस एजेंसी, स्कूल और पासपोर्ट दफ़्तर इसे पते के सबूत के रूप में माँगते हैं, और किराये, जमा राशि या मकान ख़ाली करने पर कोई झगड़ा हो तो सबसे पहले यही काग़ज़ देखा जाता है।

  1. दोनों पक्ष: मकान मालिक और किरायेदार का पूरा नाम, पिता या पति का नाम, उम्र और स्थायी पता।
  2. मकान: पूरा पता, किस तरह का है (फ़्लैट, मकान, फ़्लोर या कमरा) और फ़र्निश्ड है या नहीं।
  3. अवधि: शुरू होने की तारीख़ और कितने महीने, आमतौर पर 11।
  4. किराया: हर महीने की रकम, किस तारीख़ तक देना है और कैसे (बैंक ट्रांसफ़र या UPI का सबूत आसानी से मिलता है)।
  5. सिक्योरिटी डिपॉज़िट: कितना है, कब लौटेगा और किन बातों पर कटौती हो सकती है।
  6. बिजली, पानी और मेंटेनेंस: कौन सा बिल कौन भरेगा।
  7. लॉक-इन और नोटिस: कितने महीने तक कोई पक्ष एग्रीमेंट नहीं तोड़ सकता और उसके बाद कितने महीने का नोटिस देना होगा।
  8. सामान की सूची: पंखे, लाइट, गीज़र, फ़र्नीचर जो मकान के साथ दिए गए।
  9. हस्ताक्षर: दोनों पक्षों और दो गवाहों के, तारीख़ और जगह के साथ।
मुफ़्त किरायानामा बनाएँफ़ॉर्म भरें, Word और PDF पाएँ। कुछ भी अपलोड नहीं होता।खोलें →

रेंट एग्रीमेंट 11 महीने का क्यों होता है?

रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 की धारा 17(1)(d) के अनुसार साल-दर-साल की या एक साल से ज़्यादा की लीज़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। रजिस्ट्रेशन के लिए सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर जाना, पूरी अवधि पर स्टांप ड्यूटी और फ़ीस भरना पड़ता है। इसलिए ज़्यादातर लोग 11 महीने का एग्रीमेंट बनाते हैं और हर साल नया कर लेते हैं। 11 महीने का एग्रीमेंट भी पूरी तरह मान्य अनुबंध है, बस यह सही मूल्य के स्टांप पेपर पर होना चाहिए।

ध्यान देंमहाराष्ट्र में नियम अलग है। महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम 1999 की धारा 55 के तहत हर लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, चाहे वह 11 महीने का ही क्यों न हो। IGR महाराष्ट्र पर आधार e-KYC से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होता है।

कुछ राज्यों ने मॉडल टेनेंसी एक्ट पर आधारित क़ानून भी बनाए हैं, जिनमें एग्रीमेंट की सूचना किराया प्राधिकरण (रेंट अथॉरिटी) को देनी होती है। साइन करने से पहले अपने राज्य का नियम देख लें।

किरायानामा के लिए स्टांप पेपर कितने का लगता है?

स्टांप ड्यूटी हर राज्य अपने हिसाब से तय करता है और यह अक्सर किराये, जमा राशि और अवधि पर निर्भर करती है। दरें बदलती रहती हैं, इसलिए हम यहाँ कोई रकम नहीं लिख रहे। स्टांप पेपर या ई-स्टांप ख़रीदने से पहले अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूदा दर देखें।

राज्यआधिकारिक वेबसाइट
महाराष्ट्रIGR महाराष्ट्र
कर्नाटककावेरी (स्टांप और रजिस्ट्रेशन विभाग)
दिल्लीराजस्व विभाग, दिल्ली (SHCIL ई-स्टांप)
उत्तर प्रदेशIGRS उत्तर प्रदेश
राजस्थानई-पंजीयन राजस्थान
मध्य प्रदेशMP IGR (संपदा)
हरियाणाe-GRAS हरियाणा
गुजरातGARVI गुजरात
उत्तराखंडरजिस्ट्रेशन विभाग, उत्तराखंड

सभी राज्यों के पूरे लिंक लेख के अंत में स्रोतों में दिए हैं। अगर आपका राज्य सूची में नहीं है तो SHCIL ई-स्टांपिंग या राज्य के राजस्व विभाग से जानकारी लें।

किरायानामा कैसे बनाएँ: चरण दर चरण

  1. किराया, जमा राशि, अवधि, लॉक-इन, नोटिस और बिलों की ज़िम्मेदारी पहले आपस में तय कर लें।
  2. किरायानामा मेकर खोलें, राज्य चुनें और दोनों पक्षों, मकान और शर्तों की जानकारी भरें। सामान की सूची जोड़ें।
  3. शर्त बदलनी हो तो Word फ़ाइल लें, सीधे छापना हो तो PDF।
  4. अपने राज्य की वेबसाइट पर दर देखकर स्टांप पेपर या ई-स्टांप ख़रीदें।
  5. एग्रीमेंट स्टांप पेपर पर छापें, दोनों पक्ष हर पन्ने पर साइन करें और दो गवाह भी साइन करें।
  6. जहाँ ज़रूरी हो वहाँ रजिस्ट्रेशन कराएँ। दोनों पक्ष एक-एक मूल प्रति रखें।

सुझावकिराया बैंक या UPI से दें और सामान की सूची ज़रूर बनाएँ। डिपॉज़िट को लेकर ज़्यादातर झगड़े इन्हीं दो बातों से होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बिना रजिस्ट्रेशन का 11 महीने का किरायानामा मान्य है?

हाँ, महाराष्ट्र को छोड़कर। रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ एक साल से लंबी या साल-दर-साल की लीज़ के लिए ज़रूरी है। सही स्टांप पेपर पर बना 11 महीने का एग्रीमेंट मान्य अनुबंध है।

क्या नोटरी कराना और रजिस्ट्रेशन एक ही बात है?

नहीं। नोटरी सिर्फ़ यह प्रमाणित करता है कि लोगों ने उसके सामने साइन किए। रजिस्ट्रेशन सब-रजिस्ट्रार करता है, स्टांप ड्यूटी और फ़ीस भरने के बाद।

क्या किरायानामा हिंदी में बन सकता है?

हाँ। अनुबंध किसी भी भाषा में हो सकता है जो दोनों पक्ष समझते हों। हमारा मेकर पूरा एग्रीमेंट, सामान की सूची समेत, हिंदी में बना देता है।

स्टांप ड्यूटी मकान मालिक देगा या किरायेदार?

ज़्यादातर यह दोनों पक्ष आपस में तय करते हैं। अक्सर किरायेदार देता है या दोनों बाँट लेते हैं। जो तय हो वह एग्रीमेंट में लिख दें ताकि बाद में बहस न हो।

स्रोत

आख़िरी जाँच: . नियम और तारीख़ें बदलती रहती हैं। कोई कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पक्का कर लें।

यह लेख आम भारतीय फ़ॉर्मेट और प्रक्रियाओं की सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। नियम राज्य के हिसाब से अलग होते हैं और बदलते रहते हैं। विवाद, बड़ी रकम या किसी असामान्य मामले में वकील या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से बात करें।

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