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उपभोक्ता आयोग के लिए शिकायत का प्रारूप

उपभोक्ता शिकायत चुकाई गई राशि के अनुसार ज़िला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में दायर होती है, और अब यह ई-जागृति पर ऑनलाइन दायर की जाती है। यह फ़ॉर्म शिकायत को अदालत के सामान्य प्रारूप में बनाता है: पक्षकार, क्रमवार तथ्य, वाद कारण, क्षेत्राधिकार, परिसीमा, राहत, सत्यापन और दस्तावेज़ों की सूची।

चुकाई गई राशि से सही आयोग अपने-आप चुना जाता है।

आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयास्रोत

फ़ॉर्म खुल रहा है…

यह समय बचाने के लिए एक सामान्य प्रारूप है, क़ानूनी सलाह नहीं। हर शर्त ध्यान से पढ़ें, जो आपकी स्थिति पर लागू न हो उसे बदलें, और विवाद या बड़ी रकम के मामले में वकील से सलाह लें।

उपभोक्ता शिकायत क्या है?

यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत मुकदमा शुरू करने वाली लिखित शिकायत है। इसमें आप परिवादी और विक्रेता या सेवा देने वाला विपक्षी पक्ष होता है। तथ्य क्रमवार पैराग्राफ़ में लिखे जाते हैं, बताया जाता है कि यह आयोग सुनवाई क्यों कर सकता है (चुकाई गई राशि और आप कहाँ रहते या काम करते हैं), शिकायत दो साल के भीतर है, और आप क्या माँगते हैं: पैसा वापसी, बदलाव, मुआवज़ा और ख़र्च।

उपभोक्ता शिकायत कब काम आता है?

  • कानूनी नोटिस के बाद भी कंपनी ने ख़राब सामान ठीक नहीं किया या पैसा वापस नहीं किया।
  • बिल्डर, बीमा कंपनी, बैंक, एयरलाइन, अस्पताल या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म ने ख़राब या अधूरी सेवा दी।
  • दिखाई गई कीमत से ज़्यादा पैसा लिया गया, या भ्रामक विज्ञापन से धोखा हुआ।
  • राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से शिकायत का हल नहीं निकला।

उपभोक्ता शिकायत के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

  • चुकाई गई राशि दिखाने वाला इनवॉइस, रसीद या भुगतान का प्रमाण।
  • वारंटी कार्ड, अनुबंध या पॉलिसी, जो लागू हो।
  • तारीख के क्रम में शिकायतें, ईमेल, चैट और सर्विस रिपोर्ट।
  • कानूनी नोटिस, डाक रसीद और ट्रैकिंग या AD कार्ड के साथ, अगर भेजा हो।
  • ख़राबी की फ़ोटो, वीडियो या विशेषज्ञ रिपोर्ट।
  • पहचान और पते का प्रमाण (क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार के लिए)।

उपभोक्ता शिकायत कैसे बनाएँ: स्टांप पेपर, हस्ताक्षर, जमा करना

  1. फ़ॉर्म भरें। आयोग चुकाई गई राशि से तय होता है: ₹50 लाख तक ज़िला आयोग, ₹2 करोड़ तक राज्य आयोग, उससे ऊपर राष्ट्रीय आयोग।
  2. तथ्य बदलने हों तो Word फ़ाइल, वैसे ही दायर करनी हो तो PDF डाउनलोड करें। शिकायत और सत्यापन पर हस्ताक्षर करें।
  3. e-jagriti.gov.in पर रजिस्टर करें, “File a case” चुनें, जानकारी भरें और हस्ताक्षरित शिकायत व दस्तावेज़ PDF में अपलोड करें।
  4. फ़ीस लागू हो तो ऑनलाइन भरें। चुकाई गई राशि ₹5 लाख तक हो तो कोई फ़ीस नहीं लगती।
  5. केस नंबर और सुनवाई की तारीख लिख लें। दायर की गई हर चीज़ का पूरा सेट रखें और सुनवाई में स्वयं या जहाँ अनुमति हो वीडियो से शामिल हों।

आम ग़लतियाँ

  • समस्या के दो साल बाद देरी माफ़ी के आवेदन के बिना शिकायत करना।
  • माँगे गए मुआवज़े से आयोग चुनना। आयोग चुकाई गई राशि से तय होता है, माँगी गई राशि से नहीं।
  • व्यावसायिक ख़रीद को उपभोक्ता शिकायत में डालना। दोबारा बेचने या व्यावसायिक उपयोग के लिए ख़रीदा सामान आमतौर पर अधिनियम के बाहर है।
  • तारीखें और संदर्भ संख्या छोड़ देना। हर तथ्य सूची के किसी दस्तावेज़ से जुड़ा होना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

किस उपभोक्ता आयोग में शिकायत करूँ?

यह सामान या सेवा के लिए चुकाई गई कीमत पर निर्भर है: ₹50 लाख तक ज़िला आयोग, ₹50 लाख से ऊपर ₹2 करोड़ तक राज्य आयोग, और ₹2 करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय आयोग। आप जहाँ रहते या काम करते हैं, या जहाँ कंपनी का दफ़्तर है, वहाँ शिकायत कर सकते हैं।

उपभोक्ता शिकायत की समय सीमा क्या है?

वाद कारण उत्पन्न होने से दो साल। देर से दी गई शिकायत तभी स्वीकार होती है जब आयोग देरी का कारण मान ले।

क्या कोई फ़ीस लगती है?

चुकाई गई राशि ₹5 लाख तक हो तो कोई फ़ीस नहीं। उससे ऊपर स्लैब के हिसाब से फ़ीस लगती है; ई-जागृति दायर करते समय राशि दिखाता है।

क्या वकील ज़रूरी है?

नहीं। उपभोक्ता ख़ुद शिकायत दायर कर सकता है और ख़ुद बहस कर सकता है। पैसा वापसी और ख़राबी के साधारण मामलों में बहुत लोग ऐसा करते हैं।

क्या मेरी जानकारी सुरक्षित है?

हाँ। फ़ॉर्म, प्रीव्यू, Word और PDF सब आपके ब्राउज़र में इसी डिवाइस पर बनते हैं। आप जो लिखते हैं वह कहीं अपलोड नहीं होता। यह ड्राफ़्ट बनाने में मदद है, क़ानूनी सलाह नहीं।

स्रोत और आख़िरी जाँच

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