लाइफ़ इवेंट गाइड · 9 कदम

किराये का घर किरायानामा, वेरिफ़िकेशन, रसीद, डिपॉज़िट वापसी

किरायेदार के लिए आसान चेकलिस्ट, मकान मालिक के लिए भी ज़रूरी बातें। स्टांप ड्यूटी, डिपॉज़िट और वेरिफ़िकेशन के नियम हर राज्य में अलग हैं, इसलिए हम सरकारी पेज तक पहुँचाते हैं।

आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयास्रोत

कदम-दर-कदम

  1. सही स्टांप पर लिखित किरायानामा बनाएँ

    • कब: डिपॉज़िट देने या सामान ले जाने से पहले
    • समय: 1 से 2 घंटे

    किराया, डिपॉज़िट, नोटिस पीरियड, लॉक-इन, मेंटेनेंस, कौन सा बिल कौन भरेगा और सालाना बढ़ोतरी, सब लिखित में रखें और दोनों पक्ष दस्तख़त करें। स्टांप ड्यूटी आपके राज्य पर निर्भर है, इसलिए राज्य के नियम से ई-स्टांप पेपर लें या ऑनलाइन भरें। एक साल से ज़्यादा या साल-दर-साल की लीज़ की रजिस्ट्री रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत ज़रूरी है, इसीलिए 11 महीने के किरायानामे आम हैं; महाराष्ट्र में लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट IGR पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्टर हो सकता है।

  2. डिपॉज़िट तय करें और बैंक से भुगतान करें

    • कब: किरायानामे पर दस्तख़त के समय
    • समय: 15 मिनट

    मॉडल किरायेदारी अधिनियम 2021 में घर के लिए डिपॉज़िट की सीमा दो महीने का किराया है, पर यह सिर्फ़ उन राज्यों में लागू है जिन्होंने इस तरह का क़ानून बनाया है, इसलिए अपना राज्य जाँचें। आप कहीं भी रहें, डिपॉज़िट की रक़म, वापसी का समय और कटौती की शर्तें किरायानामे में लिखें। डिपॉज़िट और किराया बैंक ट्रांसफ़र या UPI से दें ताकि सबूत रहे।

  3. पुलिस से किरायेदार वेरिफ़िकेशन कराएँ

    • कब: पहले हफ़्ते में
    • समय: ऑनलाइन 15 से 30 मिनट

    कई शहरों में मकान मालिक को नए किरायेदार की जानकारी स्थानीय पुलिस को देनी होती है, और यह आम तौर पर मालिक ही किरायेदार के पहचान पत्र और फ़ोटो के साथ भरता है। दिल्ली पुलिस किरायेदार रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन करती है, और गृह मंत्रालय के डिजिटल पुलिस पोर्टल से कई राज्यों के लिए किरायेदार वेरिफ़िकेशन माँगा जा सकता है। किरायेदार इसकी पावती की कॉपी रखें, बाद में पते की जाँच में काम आती है।

  4. पहले दिन घर की हालत का रिकॉर्ड रखें

    • कब: जिस दिन घर में आएँ
    • समय: 30 मिनट

    दीवारों, फ़िटिंग और सामान की तारीख़ वाली फ़ोटो और छोटा वीडियो लें, और बिजली व पानी के मीटर की रीडिंग लिख लें। इन्हें मैसेज या ईमेल से मालिक को भेज दें, ताकि दोनों के पास एक जैसा रिकॉर्ड रहे। बाद में डिपॉज़िट के झगड़े से बचने का यह सबसे आसान तरीका है।

  5. HRA के लिए किराये की रसीदें लें

    • कब: हर महीने
    • समय: महीने में 5 मिनट

    हर महीने दस्तख़त वाली रसीद लें, या किरायानामे के साथ बैंक या UPI का रिकॉर्ड रखें। HRA क्लेम करें तो कंपनी रसीदें माँगेगी, और ज़्यादा किराये पर अक्सर मालिक का PAN भी। HRA से टैक्स बचेगा या नहीं, यह आपकी टैक्स व्यवस्था पर निर्भर है, इसलिए पहले जाँच लें।

  6. किराया ₹50,000 महीने से ज़्यादा हो तो 2% TDS काटें

    • कब: जिस महीने TDS काटा, उसके ख़त्म होने के 30 दिन के अंदर जमा करें
    • समय: ऑनलाइन 30 मिनट
    • अगर लागू हो: सिर्फ़ अगर किराया ₹50,000 महीने से ज़्यादा है

    जो व्यक्ति या HUF ₹50,000 महीने से ज़्यादा किराया देता है, वह इनकम-टैक्स एक्ट 2025 की धारा 393(1) के तहत 2% TDS काटता है। इसे ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर अपने PAN से लॉग-इन करके फ़ॉर्म 141 (शेड्यूल A) से जमा करें, जिसने फ़ॉर्म 26QC की जगह ली है। मालिक ध्यान दें: यह TDS आपके टैक्स क्रेडिट में दिखता है, इसलिए किरायेदार को सही PAN दें।

  7. किरायानामे से आधार का पता बदलें

    • कब: पहले महीने में
    • समय: ऑनलाइन 15 मिनट, अपडेट होने में 30 दिन तक
    • सरकारी फ़ीस: आधार ऐप या केंद्र पर पता बदलने के ₹75स्रोत

    UIDAI रजिस्टर्ड या बिना रजिस्ट्री वाले किरायानामे, लीज़ या लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट को पते का प्रमाण मानता है। पहले आधार अपडेट करें, फिर उसी से बैंक, वोटर आईडी और गैस कनेक्शन बदलें। किरायानामा आपके नाम पर नहीं है तो पते के हलफ़नामे या परिवार के मुखिया वाले तरीके से मदद मिल सकती है।

  8. नोटिस दें और डिपॉज़िट वापस लें

    • कब: किरायानामे में लिखे नोटिस पीरियड के हिसाब से
    • समय: आख़िरी दिन 1 से 2 घंटे

    किरायानामे के हिसाब से लिखित नोटिस दें, आख़िरी बिल चुकाएँ और मीटर की आख़िरी रीडिंग लिख लें। मालिक के साथ घर देखें, पहले दिन की फ़ोटो से मिलाएँ और कटौती लिखित में तय करें। मॉडल किरायेदारी अधिनियम में घर ख़ाली सौंपते समय, जायज़ कटौती के बाद, डिपॉज़िट लौटाना होता है; बाक़ी जगह किरायानामे की शर्तें लागू हैं।

  9. अगर विवाद हो जाए

    • कब: डिपॉज़िट न लौटे या शर्तें टूटें तब
    • अगर लागू हो: सिर्फ़ अगर कुछ गड़बड़ हो

    पहले बात करें, और अपनी माँग तारीख़ और रक़म के साथ लिखित में रखें। मॉडल किरायेदारी अधिनियम वाले राज्यों में मामला रेंट अथॉरिटी और रेंट कोर्ट में जाता है; बाक़ी जगह राज्य के क़ानून के तहत रेंट कंट्रोलर या सिविल कोर्ट में। अटका हुआ डिपॉज़िट वापस पाने के लिए अक्सर पैसे की वसूली का लीगल नोटिस काफ़ी होता है।

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लोग पूछते हैं

ज़्यादातर किरायानामे 11 महीने के क्यों होते हैं?

रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत साल-दर-साल या एक साल से ज़्यादा की लीज़ की रजिस्ट्री ज़रूरी है। ज़रूरी रजिस्ट्री से बचने के लिए लोग अवधि एक साल से कम रखते हैं, पर स्टांप ड्यूटी राज्य के नियम से लगती ही है। कुछ राज्यों के अपने नियम हैं, जैसे महाराष्ट्र में लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट के लिए।

मकान मालिक कितना सिक्योरिटी डिपॉज़िट ले सकता है?

मॉडल किरायेदारी अधिनियम में घर के लिए डिपॉज़िट की सीमा दो महीने का किराया है, पर यह वहीं लागू है जहाँ राज्य ने इस तरह का क़ानून बनाया है। आवास मंत्रालय के मुताबिक जुलाई 2022 तक आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और असम ने अपने क़ानून बदले थे। बाक़ी जगह डिपॉज़िट वही है जो लिखित में तय हो।

क्या मुझे किराये पर TDS काटना होगा?

अगर आप व्यक्ति या HUF हैं और ₹50,000 महीने से ज़्यादा किराया देते हैं, तो हाँ। 2% काटकर इनकम टैक्स ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर अपने PAN से फ़ॉर्म 141 (शेड्यूल A) के ज़रिए जमा करें। इनकम-टैक्स एक्ट 2025 में फ़ॉर्म 141 ने फ़ॉर्म 26QC की जगह ली है।

क्या किरायानामा आधार में पते के प्रमाण के लिए चलेगा?

हाँ। UIDAI की सूची में रजिस्टर्ड या बिना रजिस्ट्री वाला किरायानामा, लीज़ या लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट पते का प्रमाण माना गया है। इसे myAadhaar या आधार ऐप पर अपलोड करें, या आधार केंद्र ले जाएँ।

स्रोत

आख़िरी बार जाँचा गया: . फ़ीस और नियम बदलते रहते हैं और कई राज्य के हिसाब से अलग होते हैं। पैसे देने से पहले सरकारी साइट पर ज़रूर पक्का करें। यह आम जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं।

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