ज़्यादातर छोटे कारोबार PAN, बैंक खाते और मुफ़्त उद्यम पंजीकरण के साथ एकल स्वामित्व (प्रोप्राइटरशिप) के रूप में शुरू होते हैं। GST, दुकान लाइसेंस या FSSAI तभी लें जब आपके काम को इनकी ज़रूरत हो।
समय: प्रोप्राइटरशिप: कुछ फ़ाइल नहीं करना; LLP या कंपनी: ऑनलाइन कुछ दिन
एकल स्वामित्व (प्रोप्राइटरशिप) के लिए अलग पंजीकरण नहीं चाहिए और यह आपके अपने PAN पर चलता है, जो ज़्यादातर दुकानों और घर से कारोबार के लिए ठीक है। साझेदारी फ़र्म के लिए पार्टनरशिप डीड बनती है और राज्य में पंजीकरण होता है, जबकि LLP या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के पोर्टल पर ऑनलाइन बनती है और उसके सालाना फ़ाइलिंग ज़्यादा हैं। अपने जोखिम और योजना के हिसाब से सबसे आसान ढाँचा चुनें; बाद में बदला जा सकता है।
प्रोप्राइटर अपना PAN इस्तेमाल करता है; फ़र्म, LLP या कंपनी का अपना PAN बनता है। करंट खाता खोलें (बहुत छोटे काम के लिए अलग बचत खाता भी चलेगा), ताकि कारोबार और घर का पैसा न मिले। बैंक आम तौर पर कारोबार का सबूत माँगते हैं, जैसे उद्यम प्रमाण पत्र, GST प्रमाण पत्र या दुकान लाइसेंस, इसलिए बैंक माँगे तो अगला क़दम पहले कर लें।
उद्यम पोर्टल पर मालिक के आधार और कारोबार के PAN से पंजीकरण करें; कोई काग़ज़ अपलोड नहीं होता और प्रमाण पत्र ऑनलाइन मिलता है। उद्यम पंजीकरण बैंक लोन, सरकारी योजनाओं और MSME लाभ में काम आता है। यह मुफ़्त है और कभी रिन्यू नहीं कराना पड़ता, इसलिए एजेंट या मिलती-जुलती वेबसाइटों को पैसे न दें।
कब: टर्नओवर सीमा पार होने से पहले, या दूसरे राज्यों में बेचने से पहले
समय: ऑनलाइन लगभग एक घंटा; प्रमाण पत्र कुछ कार्य-दिवसों में
सालाना टर्नओवर सामान के लिए ₹40 लाख (अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, पुडुचेरी, सिक्किम, तेलंगाना और उत्तराखंड में ₹20 लाख) या सर्विस के लिए ₹20 लाख पार हो तो GST पंजीकरण कराएँ। मणिपुर, मिज़ोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में दोनों के लिए सीमा ₹10 लाख है। दूसरे राज्यों में या ज़्यादातर ई-कॉमर्स साइटों से सामान बेचने के लिए शुरू से पंजीकरण चाहिए। छोटे विक्रेता कंपोज़िशन स्कीम चुन सकते हैं (सामान के लिए ₹1.5 करोड़ तक, कुछ विशेष श्रेणी राज्यों में ₹75 लाख, और सर्विस के लिए ₹50 लाख तक टर्नओवर), जिसमें रिटर्न आसान हैं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता।
कब: आम तौर पर खुलने के 30 दिन के भीतर; अपना राज्य देखें
समय: एक ऑनलाइन फ़ॉर्म; कुछ दिन से कुछ हफ़्ते
ज़्यादातर राज्यों में दुकान या दफ़्तर का दुकान और प्रतिष्ठान क़ानून के तहत पंजीकरण ज़रूरी है, आम तौर पर राज्य के श्रम विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन, और नियम राज्य व कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से अलग हैं। कई नगर निकाय दुकान, खाने की जगह और वर्कशॉप के लिए ट्रेड लाइसेंस भी माँगते हैं। सही फ़ॉर्म और फ़ीस के लिए अपने राज्य का श्रम पोर्टल और नगर निगम की वेबसाइट देखें।
खाना बनाने, रखने या बेचने वाले हर व्यक्ति को, घर की रसोई या टिफ़िन सर्विस समेत, FoSCoS पोर्टल से FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस चाहिए। 1 अप्रैल 2026 से ₹1.5 करोड़ तक टर्नओवर वालों को सिर्फ़ पंजीकरण चाहिए, जो तुरंत मिलता है और अब रिन्यू नहीं कराना पड़ता; ₹50 करोड़ तक राज्य लाइसेंस है। नगर निगम या टाउन वेंडिंग कमेटी में दर्ज रेहड़ी-पटरी वाले खाने के विक्रेता पंजीकृत माने जाते हैं।
कब: शुरू करने के बाद जल्दी, अगर आपके राज्य में लागू है
समय: एक ऑनलाइन पंजीकरण
अगर लागू हो: सिर्फ़ उन राज्यों में जहाँ प्रोफ़ेशनल टैक्स लगता है
कुछ राज्य, जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, कारोबारियों और पेशेवरों पर, और आपके दिए वेतन पर, हर साल थोड़ा प्रोफ़ेशनल टैक्स लेते हैं। पंजीकरण और भुगतान राज्य के कर विभाग के पोर्टल पर होता है। अपने राज्य के नियम देखें, क्योंकि कई राज्यों में यह टैक्स है ही नहीं।
कब: जब आपके पास आसान प्रोजेक्ट प्लान और कोटेशन हों
समय: बैंक की जाँच में कुछ हफ़्ते
अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब लोन चाहिए
पीएम मुद्रा में बैंकों से बिना गारंटी लोन मिलता है: शिशु ₹50,000 तक, किशोर ₹5 लाख तक, तरुण ₹10 लाख तक, और तरुण लोन चुकाने वालों को तरुण प्लस ₹20 लाख तक। PMEGP में नई यूनिट के बैंक लोन पर 15% से 35% सब्सिडी है (मैन्युफ़ैक्चरिंग में ₹50 लाख और सर्विस में ₹20 लाख तक के प्रोजेक्ट)। स्टैंड-अप इंडिया में SC, ST और महिला उद्यमियों को नए उद्यम के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक लोन मिलता है।
हर बिक्री का सही बिल दें: पंजीकृत हैं तो GST इनवॉइस, नहीं तो सादा बिल। काउंटर पर कारोबार के खाते से जुड़ा UPI QR कोड लगाएँ, और बड़े ऑर्डर से पहले लिखित कोटेशन भेजें। GST में पंजीकृत हैं तो ख़रीदार या सप्लायर का GSTIN भरोसा करने से पहले GST पोर्टल पर जाँच लें।
कब: हिसाब रोज़; GST हर महीने या तिमाही; इनकम टैक्स हर साल
समय: रोज़ 10 मिनट
हर बिक्री, ख़रीद, ख़र्च और उधार लिखें, हो सके तो रोज़। GST में पंजीकृत हैं तो अपने चुने हिसाब से हर महीने या हर तिमाही GST रिटर्न भरें, बिक्री न हो तब भी, क्योंकि देर से रिटर्न पर लेट फ़ीस लगती है। हर साल इनकम टैक्स रिटर्न भरें; आप पर कौन-सी तारीख़ें लागू हैं, यह GST, टैक्स ऑडिट और आपके राज्य पर निर्भर है।
हमेशा नहीं। सामान बेचने पर ज़्यादातर राज्यों में सालाना ₹40 लाख टर्नओवर की सीमा है, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, पुडुचेरी, सिक्किम, तेलंगाना और उत्तराखंड में ₹20 लाख, और मणिपुर, मिज़ोरम, नगालैंड व त्रिपुरा में ₹10 लाख; सर्विस के लिए ₹20 लाख, और उन चार राज्यों में ₹10 लाख। कुछ विक्रेताओं को टर्नओवर कुछ भी हो, पंजीकरण कराना होता है, जैसे दूसरे राज्यों में सामान बेचने वाले या ज़्यादातर ई-कॉमर्स साइटों पर बेचने वाले।
क्या उद्यम पंजीकरण मुफ़्त है?
हाँ। सरकारी पोर्टल पर उद्यम पंजीकरण मुफ़्त, बिना काग़ज़ और आधार व PAN के साथ स्व-घोषणा पर होता है। इसे कभी रिन्यू नहीं कराना पड़ता। इसके लिए पैसे माँगने वाली वेबसाइटों से बचें।
घर से खाने का कारोबार करना है, क्या FSSAI लाइसेंस चाहिए?
हाँ, खाना बनाने या बेचने वाले हर व्यक्ति को FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस चाहिए। 1 अप्रैल 2026 से ₹1.5 करोड़ तक टर्नओवर वालों को सिर्फ़ पंजीकरण चाहिए, जो अब तुरंत मिलता है और रिन्यू नहीं कराना पड़ता। टाउन वेंडिंग कमेटी में दर्ज रेहड़ी-पटरी वाले खाने के विक्रेता पंजीकृत माने जाते हैं।
शुरुआत के लिए कौन-सा लोन मिल सकता है?
पीएम मुद्रा में बिना गारंटी ₹50,000 (शिशु), ₹5 लाख (किशोर) और ₹10 लाख (तरुण) तक लोन मिलता है। PMEGP में नई यूनिट के बैंक लोन पर 15% से 35% सब्सिडी है, और स्टैंड-अप इंडिया में SC, ST और महिला उद्यमियों को नए उद्यम के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक लोन मिलता है।
स्रोत
आख़िरी बार जाँचा गया: . फ़ीस और नियम बदलते रहते हैं और कई राज्य के हिसाब से अलग होते हैं। पैसे देने से पहले सरकारी साइट पर ज़रूर पक्का करें। यह आम जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं।