घबराइए मत। ज़्यादातर काग़ज़ दोबारा डाउनलोड हो जाते हैं या फिर से बन जाते हैं। पहले घंटे वाले काम से शुरू करें, फिर सिर्फ़ उन्हीं काग़ज़ों को खोलें जो खोए हैं। आपके टिक इसी फ़ोन में रहते हैं।
पहला घंटा: क्या-क्या खोया, लिखें और पुलिस रिपोर्ट कराएँ
कब: आज ही, जैसे ही पता चले
समय: थाने का 1 चक्कर या ऑनलाइन 20 मिनट
बैग या पर्स में जो भी काग़ज़ और कार्ड थे, सब लिख लें, फ़ोटोकॉपी हो तो उनके नंबर भी। नज़दीकी थाने में रिपोर्ट लिखाएँ, या राज्य पुलिस की ऑनलाइन खोया-सामान सेवा हो तो वहाँ, और रिपोर्ट की कॉपी या नंबर सँभाल लें। डिजिलॉकर देखें: कई काग़ज़ वहाँ पहले से जारी दस्तावेज़ के रूप में मिल सकते हैं।
समय: ऑनलाइन 10 मिनट; PVC कार्ड स्पीड पोस्ट से आता है
सरकारी फ़ीस: ई-आधार डाउनलोड मुफ़्त। PVC कार्ड ₹75, GST और स्पीड पोस्ट समेतस्रोत
ई-आधार छपे हुए आधार जितना ही मान्य है और myAadhaar पर जुड़े मोबाइल के OTP से मुफ़्त डाउनलोड होता है। नंबर याद न हो तो Retrieve Lost UID या EID इस्तेमाल करें। ग़लत इस्तेमाल का डर हो तो myAadhaar पर बायोमेट्रिक लॉक करें, और कार्ड चाहिए तो PVC कार्ड मँगा लें।
पैन नंबर वही रहता है; दूसरा पैन कभी न बनवाएँ, दो पैन रखना मना है। अपना पैन आयकर ई-फ़ाइलिंग प्रोफ़ाइल में या पुराने टैक्स काग़ज़ों पर देख सकते हैं। नया कार्ड या ई-पैन की कॉपी के लिए आयकर ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर बताए गए पैन रास्तों से रीप्रिंट की अर्ज़ी दें। मुफ़्त Instant e-PAN सिर्फ़ उनके लिए है जिनका कभी पैन बना ही नहीं।
समय: ऑनलाइन 30 मिनट, पासपोर्ट सेवा केंद्र का 1 चक्कर, फिर पुलिस वेरिफ़िकेशन
सरकारी फ़ीस: खोए पासपोर्ट के बदले ₹5,000 (36 पेज) या ₹6,000 (60 पेज)। तत्काल में ₹2,500 औरस्रोत
अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब पासपोर्ट खोया हो
नुक़सान की रिपोर्ट तुरंत नज़दीकी थाने में करें; विदेश में हों तो नज़दीकी भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास को भी बताएँ। फिर पासपोर्ट सेवा पर कारण में "खो गया" चुनकर री-इश्यू की अर्ज़ी दें, साथ में पुलिस रिपोर्ट और Annexure F शपथ पत्र (कब, कहाँ, कैसे खोया)। नए नंबर वाला नया पासपोर्ट मिलता है; आम तौर पर पुलिस वेरिफ़िकेशन होता है।
समय: डिजिलॉकर पर 10 मिनट; छपा डुप्लीकेट आने में हफ़्ते लग सकते हैं
अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब मार्कशीट या सर्टिफ़िकेट खोया हो
पहले डिजिलॉकर देखें: CBSE और कई राज्य बोर्ड व विश्वविद्यालय वहाँ मार्कशीट और सर्टिफ़िकेट जारी करते हैं, और ये जारी कॉपी मान्य हैं। CBSE के छपे डुप्लीकेट के लिए CBSE की वेबसाइट पर डुप्लीकेट दस्तावेज़ सेवा से अर्ज़ी दें; फ़ीस दस्तावेज़ कितना पुराना है, उस पर निर्भर है। राज्य बोर्ड या विश्वविद्यालय हो तो डुप्लीकेट की प्रक्रिया के लिए अपने बोर्ड या विश्वविद्यालय से संपर्क करें।
कब: UPI और 1930 के लिए कुछ ही मिनटों में; CEIR ब्लॉक उसी दिन
समय: 30 मिनट फ़ोन पर, फिर ऑनलाइन 15 मिनट
अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब फ़ोन खोया या चोरी हुआ हो
बैंक के सरकारी नंबर पर कॉल करके UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड ब्लॉक कराएँ, और ऑपरेटर से SIM बंद कराकर डुप्लीकेट SIM लें। पैसे कट गए हों तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत करें; जितनी जल्दी शिकायत, पैसे रुकने की उतनी उम्मीद। फिर पुलिस रिपोर्ट कराएँ और डुप्लीकेट SIM पर OTP लेकर संचार साथी (CEIR) पर फ़ोन ब्लॉक कराएँ।
वोटर सर्विस पोर्टल पर ई-EPIC (डिजिटल वोटर कार्ड) मुफ़्त डाउनलोड करें, या फ़ॉर्म 8 से नया कार्ड मँगाएँ। ड्राइविंग लाइसेंस खोया हो तो जिस राज्य ने बनाया था, उसके लिए परिवहन सारथी पर डुप्लीकेट की अर्ज़ी दें; पुलिस रिपोर्ट पास रखें, कई RTO माँगते हैं।
हमेशा नहीं। ई-आधार बिना रिपोर्ट के मुफ़्त डाउनलोड हो जाता है। खोए पासपोर्ट के लिए पुलिस रिपोर्ट चाहिए, और खोए फ़ोन को CEIR पर ब्लॉक करने के लिए भी। कई दफ़्तर दोबारा काग़ज़ बनाने से पहले पुलिस रिपोर्ट या शपथ पत्र माँगते हैं, इसलिए जल्दी रिपोर्ट लिखा देने से चक्कर बचते हैं।
आधार नंबर याद न हो तो आधार कैसे मिलेगा?
UIDAI की myAadhaar सेवाओं में Retrieve Lost UID या EID चुनें, अपना नाम और आधार से जुड़ा मोबाइल या ईमेल डालें। फिर ई-आधार मुफ़्त डाउनलोड करें, या ₹75 में PVC कार्ड मँगाएँ।
UPI वाला फ़ोन चोरी हो गया, सबसे पहले क्या करें?
बैंक को फ़ोन करके UPI और कार्ड ब्लॉक कराएँ, ऑपरेटर से SIM बंद कराएँ, और दूसरे डिवाइस से पासवर्ड बदलें। पैसे कट गए हों तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। फिर पुलिस रिपोर्ट के साथ संचार साथी पर फ़ोन ब्लॉक कराएँ।
क्या उसी नंबर का डुप्लीकेट पासपोर्ट मिलता है?
नहीं। पासपोर्ट सेवा के अनुसार डुप्लीकेट पासपोर्ट नहीं बनता। री-इश्यू की अर्ज़ी देनी होती है और नए नंबर व नई वैधता वाला पासपोर्ट मिलता है।
स्रोत
आख़िरी बार जाँचा गया: . फ़ीस और नियम बदलते रहते हैं और कई राज्य के हिसाब से अलग होते हैं। पैसे देने से पहले सरकारी साइट पर ज़रूर पक्का करें। यह आम जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं।