लाइफ़ इवेंट गाइड · 10 कदम

परिवार में किसी का निधन क्या करें, एक-एक करके

पहले दिन कुछ भी करना ज़रूरी नहीं है। 21 दिन के भीतर मृत्यु का पंजीकरण कराएँ, प्रमाण पत्र की कुछ कॉपियाँ रखें, फिर पैसे और जायदाद के काम आराम से, एक-एक दफ़्तर करके निपटाएँ।

आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयास्रोत

कदम-दर-कदम

  1. मृत्यु के कारण का मेडिकल प्रमाण पत्र लें

    • कब: पहले कुछ दिनों में
    • समय: आम तौर पर अस्पताल या डॉक्टर से मिल जाता है

    अस्पताल में मृत्यु हुई हो तो डॉक्टर मृत्यु के कारण का मेडिकल प्रमाण पत्र देते हैं और अस्पताल रजिस्ट्रार को सूचना देता है। घर पर मृत्यु हुई हो तो इलाज करने वाले डॉक्टर से यह प्रमाण पत्र माँगें। अस्पताल के काग़ज़ संभालकर रखें, क्योंकि रजिस्ट्रार और बाद में बीमा कंपनी इन्हें माँग सकते हैं।

  2. मृत्यु का पंजीकरण कराएँ और मृत्यु प्रमाण पत्र लें

    • कब: मृत्यु के 21 दिन के भीतर
    • समय: एक ऑनलाइन फ़ॉर्म या दफ़्तर का एक चक्कर; प्रमाण पत्र कुछ दिनों में
    • सरकारी फ़ीस: 21 दिन में मुफ़्त। मॉडल नियमों में देर की फ़ीस: ₹20 (30 दिन तक), ₹50 (एक साल तक, अनुमति के साथ), एक साल बाद ₹100 (मजिस्ट्रेट के आदेश के साथ)। राज्य में अलग हो सकती है।स्रोत

    जहाँ मृत्यु हुई, वहाँ के रजिस्ट्रार (नगर निकाय, ग्राम पंचायत या राज्य द्वारा तय रजिस्ट्रार) को 21 दिन के भीतर CRS पोर्टल, राज्य पोर्टल या दफ़्तर में सूचना दें। अस्पताल ने सूचना दी हो तो उनसे पंजीकरण नंबर ले लें। प्रमाण पत्र की कई कॉपियाँ लें, क्योंकि बैंक, बीमा कंपनी, EPFO और टैक्स विभाग सब एक-एक कॉपी रखते हैं।

  3. बैंक खाते, FD और लॉकर

    • कब: मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद
    • समय: हर बैंक में 1 से 2 चक्कर; काग़ज़ पूरे होने के 15 दिन में

    हर बैंक को लिखित में बताएँ और मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ दावा फ़ॉर्म जमा करें। नॉमिनी या सर्वाइवर वाले संयुक्त खाताधारक को सिर्फ़ दावा फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र चाहिए; नॉमिनी न हो तो ₹15 लाख से कम (सहकारी बैंक में ₹5 लाख) पर आसान तरीका है, इससे ज़्यादा पर बैंक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र माँग सकता है। RBI के 2025 के निर्देशों के अनुसार सारे काग़ज़ मिलने के 15 दिन के भीतर बैंक को दावा निपटाना है, देर करने पर मुआवज़ा देना होता है।

  4. जीवन और स्वास्थ्य बीमा का दावा

    • कब: कुछ हफ़्तों में; नॉमिनी है तो वारिस प्रमाण पत्र का इंतज़ार न करें
    • समय: हर पॉलिसी के लिए एक दावा फ़ॉर्म

    पॉलिसी के काग़ज़, बीमा कंपनी के SMS और ईमेल, और लोन या क्रेडिट कार्ड के साथ मिले बीमा को देखें। हर बीमा कंपनी को सूचना दें और मृत्यु प्रमाण पत्र, पॉलिसी के ब्योरे और नॉमिनी के पहचान पत्र व बैंक ब्योरे के साथ दावा करें। कंपनी बिना ठीक वजह देर करे या दावा ठुकराए, तो पहले कंपनी से शिकायत करें, फिर IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल पर; उसके बाद बीमा लोकपाल का रास्ता है।

  5. PF, EPS पेंशन और EDLI बीमा

    • कब: मृत्यु प्रमाण पत्र के बाद; जल्दबाज़ी की ज़रूरत नहीं
    • समय: नॉमिनेशन हो तो ऑनलाइन दावा एक बार में
    • अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब दिवंगत व्यक्ति का PF (UAN) खाता था

    अगर दिवंगत व्यक्ति PF वाली नौकरी में थे, तो नॉमिनी EPFO मेंबर पोर्टल पर ऑनलाइन मृत्यु दावा कर सकता है (PF की रकम और फ़ैमिली पेंशन के अलग विकल्प हैं)। EDLI बीमा तब मिलता है जब सदस्य की मृत्यु नौकरी में रहते हुए हो। नॉमिनेशन न हो तो दावा आख़िरी नियोक्ता के ज़रिए काग़ज़ पर, वारिस के काग़ज़ों के साथ होता है।

  6. पेंशन रुकवाएँ और फ़ैमिली पेंशन शुरू कराएँ

    • कब: एक महीने के भीतर बैंक को बताएँ
    • समय: बैंक का 1 चक्कर, फिर फ़ैमिली पेंशन आदेश में कुछ हफ़्ते
    • अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब दिवंगत व्यक्ति पेंशनभोगी या सरकारी कर्मचारी थे

    अगर दिवंगत व्यक्ति पेंशन ले रहे थे, तो पेंशन देने वाले बैंक या दफ़्तर को जल्दी बताएँ ताकि ज़्यादा पेंशन न आए, जिसे बाद में लौटाना पड़े। केंद्र सरकार के पेंशनभोगी के मामले में, पेंशन आदेश में दर्ज पति या पत्नी उसी बैंक में मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ आवेदन करते हैं; संयुक्त खाता हो तो अक्सर एक सादा आवेदन काफ़ी है। राज्य सरकार और EPS पेंशन के अपने फ़ॉर्म हैं, बैंक या पेंशन दफ़्तर से पूछें।

  7. ज़मीन और मकान का नामांतरण (दाखिल ख़ारिज)

    • कब: वारिस प्रमाण पत्र के बाद
    • समय: राज्य के हिसाब से कुछ हफ़्ते से कुछ महीने
    • अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब दिवंगत व्यक्ति के नाम ज़मीन, मकान या फ़्लैट था

    खेती की ज़मीन का नामांतरण (दाखिल ख़ारिज) तहसील या राज्य के भू-अभिलेख पोर्टल पर, और मकान या फ़्लैट का नगर निगम के संपत्ति कर दफ़्तर में कराएँ। आम तौर पर मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र या वसीयत, और जायदाद के ताज़ा काग़ज़ लगते हैं। नामांतरण सरकारी रिकॉर्ड बदलता है, पारिवारिक विवाद तय नहीं करता, इसलिए असहमति पहले सुलझा लें।

  8. आधार, गाड़ी, फ़ोन और दूसरे खाते

    • कब: पहले दो महीनों में
    • समय: आधार ऑनलाइन; गाड़ी के लिए RTO के 1 से 2 चक्कर

    myAadhaar पोर्टल पर मृत्यु पंजीकरण नंबर के साथ सूचना दें; UIDAI जाँच के बाद आधार नंबर निष्क्रिय करता है। गाड़ी वारिस के नाम कराने के लिए जिस RTO में गाड़ी दर्ज है, वहाँ फ़ॉर्म 31, मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार के सबूत के साथ आवेदन करें; 30 दिन के भीतर RTO को बता दें तो वारिस तीन महीने तक गाड़ी चला सकता है। मोबाइल नंबर, UPI ऐप, गैस कनेक्शन और सब्सक्रिप्शन बंद या ट्रांसफ़र कराएँ, पर बैंक के OTP की ज़रूरत ख़त्म होने तक फ़ोन नंबर चालू रखें।

ये काग़ज़ तैयार रखें

जो पास में है, उस पर टिक करें।

इसमें काम आने वाले हमारे मुफ़्त टूल

लोग पूछते हैं

मृत्यु का पंजीकरण कितने दिन में कराना होता है?

मृत्यु के 21 दिन के भीतर, उस जगह के रजिस्ट्रार के पास जहाँ मृत्यु हुई। अस्पताल में मृत्यु हो तो अस्पताल आम तौर पर सूचना दे देता है। 21 दिन में पंजीकरण मुफ़्त है; उसके बाद थोड़ी देर की फ़ीस और कुछ ज़्यादा काग़ज़ लगते हैं।

क्या बैंक खाते के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र चाहिए?

अगर नॉमिनी है या खाता संयुक्त है और उसमें सर्वाइवर की शर्त है, तो नहीं: नॉमिनी या जीवित खाताधारक को दावा फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र से पैसा मिल जाता है। नॉमिनी न हो तो RBI के नियमों में छोटी रकम (₹15 लाख से कम, सहकारी बैंक में ₹5 लाख से कम) के लिए आसान तरीका है: क्षतिपूर्ति बॉन्ड और वारिस प्रमाण पत्र या घोषणा। इससे ज़्यादा रकम पर बैंक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र माँग सकता है।

क्या दिवंगत व्यक्ति का आधार बंद हो सकता है?

अगर मृत्यु का पंजीकरण सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम वाले राज्य में हुआ है, तो परिवार myAadhaar पोर्टल पर मृत्यु पंजीकरण नंबर से सूचना दे सकता है। UIDAI जाँच के बाद तय करता है कि आधार नंबर निष्क्रिय करना है या नहीं। UIDAI सीधे मिलने वाले मृत्यु रिकॉर्ड से भी आधार निष्क्रिय करता है।

दिवंगत व्यक्ति का इनकम टैक्स रिटर्न कौन भरेगा?

कोई क़ानूनी वारिस इनकम टैक्स ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिस होने के सबूत के साथ ख़ुद को वारिस (प्रतिनिधि) के रूप में दर्ज कराता है। मंज़ूरी के बाद वह बकाया रिटर्न भर सकता है और रिकॉर्ड देख सकता है।

स्रोत

आख़िरी बार जाँचा गया: . फ़ीस और नियम बदलते रहते हैं और कई राज्य के हिसाब से अलग होते हैं। पैसे देने से पहले सरकारी साइट पर ज़रूर पक्का करें। यह आम जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं।

Search by task, life event, format or tool name, in English, हिंदी or Hinglish.