पहले दिन कुछ भी करना ज़रूरी नहीं है। 21 दिन के भीतर मृत्यु का पंजीकरण कराएँ, प्रमाण पत्र की कुछ कॉपियाँ रखें, फिर पैसे और जायदाद के काम आराम से, एक-एक दफ़्तर करके निपटाएँ।
अस्पताल में मृत्यु हुई हो तो डॉक्टर मृत्यु के कारण का मेडिकल प्रमाण पत्र देते हैं और अस्पताल रजिस्ट्रार को सूचना देता है। घर पर मृत्यु हुई हो तो इलाज करने वाले डॉक्टर से यह प्रमाण पत्र माँगें। अस्पताल के काग़ज़ संभालकर रखें, क्योंकि रजिस्ट्रार और बाद में बीमा कंपनी इन्हें माँग सकते हैं।
समय: एक ऑनलाइन फ़ॉर्म या दफ़्तर का एक चक्कर; प्रमाण पत्र कुछ दिनों में
सरकारी फ़ीस: 21 दिन में मुफ़्त। मॉडल नियमों में देर की फ़ीस: ₹20 (30 दिन तक), ₹50 (एक साल तक, अनुमति के साथ), एक साल बाद ₹100 (मजिस्ट्रेट के आदेश के साथ)। राज्य में अलग हो सकती है।स्रोत
जहाँ मृत्यु हुई, वहाँ के रजिस्ट्रार (नगर निकाय, ग्राम पंचायत या राज्य द्वारा तय रजिस्ट्रार) को 21 दिन के भीतर CRS पोर्टल, राज्य पोर्टल या दफ़्तर में सूचना दें। अस्पताल ने सूचना दी हो तो उनसे पंजीकरण नंबर ले लें। प्रमाण पत्र की कई कॉपियाँ लें, क्योंकि बैंक, बीमा कंपनी, EPFO और टैक्स विभाग सब एक-एक कॉपी रखते हैं।
समय: हर बैंक में 1 से 2 चक्कर; काग़ज़ पूरे होने के 15 दिन में
हर बैंक को लिखित में बताएँ और मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ दावा फ़ॉर्म जमा करें। नॉमिनी या सर्वाइवर वाले संयुक्त खाताधारक को सिर्फ़ दावा फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र चाहिए; नॉमिनी न हो तो ₹15 लाख से कम (सहकारी बैंक में ₹5 लाख) पर आसान तरीका है, इससे ज़्यादा पर बैंक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र माँग सकता है। RBI के 2025 के निर्देशों के अनुसार सारे काग़ज़ मिलने के 15 दिन के भीतर बैंक को दावा निपटाना है, देर करने पर मुआवज़ा देना होता है।
कब: कुछ हफ़्तों में; नॉमिनी है तो वारिस प्रमाण पत्र का इंतज़ार न करें
समय: हर पॉलिसी के लिए एक दावा फ़ॉर्म
पॉलिसी के काग़ज़, बीमा कंपनी के SMS और ईमेल, और लोन या क्रेडिट कार्ड के साथ मिले बीमा को देखें। हर बीमा कंपनी को सूचना दें और मृत्यु प्रमाण पत्र, पॉलिसी के ब्योरे और नॉमिनी के पहचान पत्र व बैंक ब्योरे के साथ दावा करें। कंपनी बिना ठीक वजह देर करे या दावा ठुकराए, तो पहले कंपनी से शिकायत करें, फिर IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल पर; उसके बाद बीमा लोकपाल का रास्ता है।
कब: मृत्यु प्रमाण पत्र के बाद; जल्दबाज़ी की ज़रूरत नहीं
समय: नॉमिनेशन हो तो ऑनलाइन दावा एक बार में
अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब दिवंगत व्यक्ति का PF (UAN) खाता था
अगर दिवंगत व्यक्ति PF वाली नौकरी में थे, तो नॉमिनी EPFO मेंबर पोर्टल पर ऑनलाइन मृत्यु दावा कर सकता है (PF की रकम और फ़ैमिली पेंशन के अलग विकल्प हैं)। EDLI बीमा तब मिलता है जब सदस्य की मृत्यु नौकरी में रहते हुए हो। नॉमिनेशन न हो तो दावा आख़िरी नियोक्ता के ज़रिए काग़ज़ पर, वारिस के काग़ज़ों के साथ होता है।
समय: बैंक का 1 चक्कर, फिर फ़ैमिली पेंशन आदेश में कुछ हफ़्ते
अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब दिवंगत व्यक्ति पेंशनभोगी या सरकारी कर्मचारी थे
अगर दिवंगत व्यक्ति पेंशन ले रहे थे, तो पेंशन देने वाले बैंक या दफ़्तर को जल्दी बताएँ ताकि ज़्यादा पेंशन न आए, जिसे बाद में लौटाना पड़े। केंद्र सरकार के पेंशनभोगी के मामले में, पेंशन आदेश में दर्ज पति या पत्नी उसी बैंक में मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ आवेदन करते हैं; संयुक्त खाता हो तो अक्सर एक सादा आवेदन काफ़ी है। राज्य सरकार और EPS पेंशन के अपने फ़ॉर्म हैं, बैंक या पेंशन दफ़्तर से पूछें।
समय: राजस्व दफ़्तर में कुछ हफ़्ते; कोर्ट में कुछ महीने
वारिस प्रमाण पत्र राज्य का राजस्व दफ़्तर देता है, आम तौर पर तहसीलदार या राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से, और इसका नाम व तरीका हर राज्य में अलग है। उत्तराधिकार प्रमाण पत्र अलग चीज़ है: यह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत सिविल कोर्ट देता है, और नॉमिनी या वसीयत न होने पर बड़ी रकम के लिए बैंक या कंपनियाँ इसे माँग सकती हैं। आवेदन से पहले बैंक या दफ़्तर से पूछ लें कि उन्हें कौन-सा चाहिए।
अगर लागू हो: सिर्फ़ तब, जब दिवंगत व्यक्ति के नाम ज़मीन, मकान या फ़्लैट था
खेती की ज़मीन का नामांतरण (दाखिल ख़ारिज) तहसील या राज्य के भू-अभिलेख पोर्टल पर, और मकान या फ़्लैट का नगर निगम के संपत्ति कर दफ़्तर में कराएँ। आम तौर पर मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र या वसीयत, और जायदाद के ताज़ा काग़ज़ लगते हैं। नामांतरण सरकारी रिकॉर्ड बदलता है, पारिवारिक विवाद तय नहीं करता, इसलिए असहमति पहले सुलझा लें।
कब: मृत्यु वाले साल के रिटर्न की आख़िरी तारीख़ से पहले
समय: आवेदन में 15 मिनट; मंज़ूरी में लगभग एक हफ़्ता
इनकम टैक्स ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर वारिस अपने खाते से लॉग इन करके दिवंगत व्यक्ति के प्रतिनिधि के रूप में पंजीकरण करता है, और दिवंगत का PAN, मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिस होने का सबूत अपलोड करता है। विभाग आम तौर पर लगभग एक हफ़्ते में अनुरोध देखता है। मंज़ूरी के बाद मृत्यु की तारीख़ तक की आय का बकाया रिटर्न भरें और रिफ़ंड हो तो लें।
समय: आधार ऑनलाइन; गाड़ी के लिए RTO के 1 से 2 चक्कर
myAadhaar पोर्टल पर मृत्यु पंजीकरण नंबर के साथ सूचना दें; UIDAI जाँच के बाद आधार नंबर निष्क्रिय करता है। गाड़ी वारिस के नाम कराने के लिए जिस RTO में गाड़ी दर्ज है, वहाँ फ़ॉर्म 31, मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार के सबूत के साथ आवेदन करें; 30 दिन के भीतर RTO को बता दें तो वारिस तीन महीने तक गाड़ी चला सकता है। मोबाइल नंबर, UPI ऐप, गैस कनेक्शन और सब्सक्रिप्शन बंद या ट्रांसफ़र कराएँ, पर बैंक के OTP की ज़रूरत ख़त्म होने तक फ़ोन नंबर चालू रखें।
मृत्यु के 21 दिन के भीतर, उस जगह के रजिस्ट्रार के पास जहाँ मृत्यु हुई। अस्पताल में मृत्यु हो तो अस्पताल आम तौर पर सूचना दे देता है। 21 दिन में पंजीकरण मुफ़्त है; उसके बाद थोड़ी देर की फ़ीस और कुछ ज़्यादा काग़ज़ लगते हैं।
क्या बैंक खाते के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र चाहिए?
अगर नॉमिनी है या खाता संयुक्त है और उसमें सर्वाइवर की शर्त है, तो नहीं: नॉमिनी या जीवित खाताधारक को दावा फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र से पैसा मिल जाता है। नॉमिनी न हो तो RBI के नियमों में छोटी रकम (₹15 लाख से कम, सहकारी बैंक में ₹5 लाख से कम) के लिए आसान तरीका है: क्षतिपूर्ति बॉन्ड और वारिस प्रमाण पत्र या घोषणा। इससे ज़्यादा रकम पर बैंक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र माँग सकता है।
क्या दिवंगत व्यक्ति का आधार बंद हो सकता है?
अगर मृत्यु का पंजीकरण सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम वाले राज्य में हुआ है, तो परिवार myAadhaar पोर्टल पर मृत्यु पंजीकरण नंबर से सूचना दे सकता है। UIDAI जाँच के बाद तय करता है कि आधार नंबर निष्क्रिय करना है या नहीं। UIDAI सीधे मिलने वाले मृत्यु रिकॉर्ड से भी आधार निष्क्रिय करता है।
दिवंगत व्यक्ति का इनकम टैक्स रिटर्न कौन भरेगा?
कोई क़ानूनी वारिस इनकम टैक्स ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिस होने के सबूत के साथ ख़ुद को वारिस (प्रतिनिधि) के रूप में दर्ज कराता है। मंज़ूरी के बाद वह बकाया रिटर्न भर सकता है और रिकॉर्ड देख सकता है।
स्रोत
आख़िरी बार जाँचा गया: . फ़ीस और नियम बदलते रहते हैं और कई राज्य के हिसाब से अलग होते हैं। पैसे देने से पहले सरकारी साइट पर ज़रूर पक्का करें। यह आम जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं।