किराया राज्य के क़ानून से चलता है। ज़्यादातर राज्य पुराना किराया नियंत्रण अधिनियम मानते हैं; कुछ ने केंद्र का मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 अपनाया है। कुछ अधिकार लगभग हर जगह लागू हैं।
लिखित अनुबंध बनवाएँ और किराए की रसीदें रखें। मकान मालिक पानी या बिजली नहीं काट सकता, न ज़बरदस्ती निकाल सकता है; बेदख़ली क़ानूनी प्रक्रिया से ही होगी। मॉडल अधिनियम में घर के लिए डिपॉज़िट अधिकतम दो महीने का किराया है और घर लौटाने पर उचित कटौती के बाद वापस करना होगा। 11 महीने से लंबे अनुबंध का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है।
मॉडल किरायेदारी अधिनियम में हर किरायेदारी लिखित होनी चाहिए और दो महीने में किराया प्राधिकरण को बतानी होती है। बाकी जगह भी यही सबसे बड़ी सुरक्षा है। एक साल से लंबा पट्टा रजिस्ट्रेशन अधिनियम में रजिस्टर कराना होता है, इसलिए लोग 11 महीने का अनुबंध बनाते हैं।
मॉडल किरायेदारी अधिनियम 2021; रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908, धारा 17
डिपॉज़िट की सीमा (जहाँ लागू)
घर के लिए अधिकतम दो महीने का किराया, दुकान या ऑफ़िस के लिए छह महीने का। मकान मालिक को ख़ाली घर वापस मिलते ही असली बकाया काटकर लौटाना होगा।
मॉडल किरायेदारी अधिनियम 2021
निजता
जाँच या मरम्मत के लिए आने से पहले मकान मालिक को लिखित नोटिस देना चाहिए, आम तौर पर कम से कम 24 घंटे पहले, और ठीक समय पर आना चाहिए।
मॉडल किरायेदारी अधिनियम 2021; राज्यों में अलग
ज़रूरी सेवाएँ नहीं काट सकते
निकालने के लिए पानी, बिजली या दूसरी ज़रूरी सेवाएँ काटना मॉडल अधिनियम और ज़्यादातर किराया नियंत्रण क़ानूनों में मना है। किराया प्राधिकरण या रेंट कंट्रोलर से शिकायत करें।
मॉडल किरायेदारी अधिनियम 2021; राज्य किराया नियंत्रण अधिनियम
बेदख़ली सिर्फ़ क़ानून से
क़ानून में लिखे कारणों (किराया न देना, ग़लत इस्तेमाल, बिना अनुमति किराये पर देना, तय अवधि ख़त्म होना आदि) पर और किराया प्राधिकरण, रेंट कोर्ट या सिविल कोर्ट के ज़रिए ही निकाला जा सकता है। ताला बदलना या सामान बाहर फेंकना ग़ैरक़ानूनी है।
राज्य किराया नियंत्रण अधिनियम; मॉडल अधिनियम
आपकी ज़िम्मेदारियाँ
समय पर किराया दें, घर का ध्यान रखें, छोटी मरम्मत करें, लिखित अनुमति के बिना आगे किराये पर न दें, और छोड़ने से पहले तय नोटिस दें।
किराया अनुबंध
क्या करें, कदम दर कदम
घर लेने से पहले
लिखित अनुबंध बनाएँ (हमारा किराया अनुबंध या लीव एंड लाइसेंस ड्राफ़्ट), राज्य के हिसाब से स्टांप ड्यूटी दें, और घर की तारीख़ वाली फ़ोटो लें।
पुलिस सत्यापन
कई शहरों में किरायेदार का पुलिस या ऑनलाइन सत्यापन ज़रूरी है। मकान मालिक से पूरा करवाएँ।
किराया रिकॉर्ड के साथ दें
UPI या बैंक ट्रांसफ़र से दें, या हस्ताक्षर वाली रसीद लें। HRA लेने में भी काम आती हैं।
विवाद हो तो
पहले विनम्र लिखित नोटिस भेजें। फिर अपने इलाक़े के किराया प्राधिकरण, रेंट कंट्रोलर या सिविल कोर्ट जाएँ। मुफ़्त क़ानूनी सहायता मदद कर सकती है (15100)।
घर छोड़ते समय
तय नोटिस दें, चाबी लिखित रसीद पर सौंपें, और डिपॉज़िट वापसी लिखकर माँगें।
यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। क़ानून और राज्य के नियम बदलते रहते हैं; आधिकारिक स्रोत देखें या वकील से पूछें। मुफ़्त क़ानूनी सहायता: NALSA 15100 मिलाएँ या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ।
लोग पूछते हैं
कौन से राज्य मॉडल किरायेदारी अधिनियम मानते हैं?
किरायेदारी राज्य का विषय है, इसलिए हर राज्य ख़ुद तय करता है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और असम ने 2021 में इसी तर्ज़ पर क़ानून बनाए, और तमिलनाडु का 2017 का क़ानून भी मिलता-जुलता है। दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्य अब भी अपने किराया नियंत्रण अधिनियम मानते हैं। अपने राज्य का आवास या राजस्व विभाग देखें।
क्या मकान मालिक कभी भी किराया बढ़ा सकता है?
किराया अनुबंध के हिसाब से बदला जा सकता है। मॉडल अधिनियम में बदलाव से पहले मकान मालिक को लिखित नोटिस (तीन महीने) देना होता है। पुराने किराया नियंत्रण वाले मामलों में क़ानून "मानक किराया" तय करता है।
मकान मालिक डिपॉज़िट नहीं लौटा रहा। क्या करें?
तारीख़ देकर लिखित माँग भेजें। फिर क़ानूनी नोटिस भेजें (हमारा भुगतान क़ानूनी नोटिस ड्राफ़्ट काम आएगा) और किराया प्राधिकरण जाएँ या वसूली का सिविल मुक़दमा करें।