फ़्लैट या घर ख़रीदने की आसान चेकलिस्ट: पैसा देने से पहले क्या जाँचें, रजिस्ट्री पर क्या भरें और चाबी मिलने के बाद क्या अपडेट करें। नियम और दरें हर राज्य में अलग हैं, इसलिए हम आपको सरकारी पोर्टल तक पहुँचाते हैं।
अगर लागू हो: ख़ास तौर पर नए या बन रहे प्रोजेक्ट के लिए; पुरानी बिल्डिंग में रीसेल घर RERA पर न भी हों
अपने राज्य की RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट और बिल्डर का नाम खोजें, रजिस्ट्रेशन नंबर, पास नक़्शा और पूरा होने की तारीख़ नोट करें। बिल्डर पर दर्ज शिकायतें या आदेश भी पढ़ें। जो प्रोजेक्ट पोर्टल पर न मिले, उस पर बुकिंग की रक़म न दें।
विक्रेता से पुराने बैनामों की पूरी कड़ी माँगें और मालिक का नाम व प्लॉट का ब्योरा राज्य के भू-अभिलेख से मिलाएँ। सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर से भार-मुक्ति प्रमाण पत्र (encumbrance certificate) या सर्च रिपोर्ट लें, ताकि पता चले कि प्रॉपर्टी गिरवी या विवाद में तो नहीं। NGDRS वाले कई राज्यों में यह भी देख सकते हैं कि प्रॉपर्टी बिक्री पर रोक वाली सूची में तो नहीं। किसी प्रॉपर्टी वकील से सर्च रिपोर्ट बनवाना समझदारी है।
दो या तीन बैंकों से ब्याज दर, प्रोसेसिंग फ़ीस और समय से पहले चुकाने की शर्तें मिलाएँ, और बिक्री एग्रीमेंट से पहले लिखित सैंक्शन लेटर ले लें। बैंक प्रॉपर्टी की अपनी क़ानूनी और तकनीकी जाँच करता है, जो एक अच्छी दूसरी राय है। डाउन पेमेंट, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री का पैसा अपनी जेब से रखें, बैंक आम तौर पर इसके लिए लोन नहीं देते।
अगर लागू हो: सिर्फ़ शहर में पहला घर लेने वाले पात्र परिवारों के लिए
PMAY-U 2.0 शहर के EWS, LIG और MIG परिवारों (सालाना आय ₹9 लाख तक) की मदद करती है, जिनके पास भारत में कहीं पक्का घर नहीं है। इसके ब्याज सब्सिडी वाले हिस्से से पात्र ख़रीदारों का होम लोन ब्याज कम होता है। PMAY-U पोर्टल पर या अपने नगर निकाय में आवेदन करें, और लोन मिलने से पहले बैंक से इसके बारे में पूछें।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री फ़ीस आपका राज्य तय करता है और ये समय-समय पर बदलती हैं। आम तौर पर हिसाब सौदे की रक़म और उस इलाक़े के सरकारी सर्किल रेट में से जो ज़्यादा हो, उस पर होता है। अपने राज्य के IGR या NGDRS पोर्टल पर सर्किल रेट देखें और ई-स्टांप या ऑनलाइन चालान से ही भुगतान करें, किसी एजेंट को नक़द न दें।
1% TDS काटें और फ़ॉर्म 141 भरें (₹50 लाख या ज़्यादा)
कब: जिस महीने TDS काटा, उसके ख़त्म होने के 30 दिन के अंदर जमा करें
समय: ऑनलाइन 30 मिनट
अगर लागू हो: सिर्फ़ अगर क़ीमत या स्टांप ड्यूटी वैल्यू ₹50 लाख या ज़्यादा हो
अगर क़ीमत या स्टांप ड्यूटी वैल्यू ₹50 लाख या ज़्यादा है, तो इनकम-टैक्स एक्ट 2025 की धारा 393(1) के तहत ख़रीदार भारत में रहने वाले विक्रेता को भुगतान से 1% TDS काटता है। इसे ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर अपने PAN से लॉग-इन करके फ़ॉर्म 141 (शेड्यूल B) से जमा करें, जिसने फ़ॉर्म 26QB की जगह ली है; हर साझा ख़रीदार अपने हिस्से का फ़ॉर्म अलग भरता है। विक्रेता NRI हो तो दर अलग है और शेड्यूल E लगता है, इसलिए टैक्स जानकार की मदद लें।
सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर में बैनामे की रजिस्ट्री कराएँ
कब: तय की गई रजिस्ट्री की तारीख़ पर
समय: दफ़्तर में आधा दिन
राज्य के पोर्टल पर रजिस्ट्री का समय बुक करें, फिर विक्रेता, राज्य के नियम के मुताबिक गवाहों, असली पहचान पत्रों और स्टांप ड्यूटी की रसीद के साथ सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर जाएँ। दस्तख़त से पहले पूरा बैनामा पढ़ें और क्षेत्रफल, फ़्लैट नंबर और क़ीमत मिलाएँ। रजिस्टर्ड बैनामा (या उसकी स्कैन कॉपी) लें और असली सँभालकर रखें; लोन हो तो बैंक इसे अपने पास रखता है।
दाख़िल-ख़ारिज कराएँ और प्रॉपर्टी टैक्स अपने नाम करें
कब: रजिस्ट्री के तुरंत बाद
समय: कुछ हफ़्ते, राज्य के हिसाब से अलग
दाख़िल-ख़ारिज (म्यूटेशन) से नगर निगम के रिकॉर्ड (फ़्लैट और शहरी प्लॉट) या राजस्व भू-अभिलेख (ज़मीन) में मालिक का नाम बदलता है। रजिस्टर्ड बैनामे और पिछली प्रॉपर्टी टैक्स रसीद के साथ नगर निकाय या तहसील में, या जहाँ राज्य अनुमति दे वहाँ ऑनलाइन, आवेदन करें। उसके बाद हर साल प्रॉपर्टी टैक्स अपने नाम से भरें।
रजिस्टर्ड बैनामे, पहचान पत्र और पिछले भरे हुए बिल के साथ बिजली कंपनी और जल विभाग में नाम बदलने का आवेदन दें। विक्रेता से हाउसिंग सोसाइटी का नो-ड्यूज़ पत्र लें और शेयर सर्टिफ़िकेट या सदस्यता अपने नाम कराएँ। क़ब्ज़ा लेने से पहले पुराने बकाया चुकवा लें, या उन्हें क़ीमत में घटवा लें।
UIDAI रजिस्टर्ड बैनामे को, और एक साल से पुरानी न हो ऐसी प्रॉपर्टी टैक्स रसीद को, पते का प्रमाण मानता है। पहले आधार अपडेट करें, फिर बैंक, वोटर आईडी और गैस कनेक्शन। आधार ऐप या केंद्र पर पता बदलने की फ़ीस ₹75 है।
यह हर राज्य तय करता है, और आम तौर पर सौदे की रक़म और सरकारी सर्किल रेट में से जो ज़्यादा हो उस पर लगती है। बजट बनाने से पहले अपने राज्य के रजिस्ट्रेशन (IGR) पोर्टल या सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर से मौजूदा दर पता करें।
क्या फ़्लैट ख़रीदने पर TDS काटना होता है?
हाँ, अगर क़ीमत या स्टांप ड्यूटी वैल्यू ₹50 लाख या उससे ज़्यादा है (खेती की ज़मीन इसमें नहीं आती)। ख़रीदार भारत में रहने वाले विक्रेता को भुगतान से 1% काटकर इनकम टैक्स ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर अपने PAN से फ़ॉर्म 141 के ज़रिए जमा करता है। इनकम-टैक्स एक्ट 2025 में फ़ॉर्म 141 ने फ़ॉर्म 26QB की जगह ली है।
कैसे पता करें कि प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड है?
अपने राज्य की RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट और बिल्डर का नाम खोजें। बिल्डर के विज्ञापन और एग्रीमेंट पर भी रजिस्ट्रेशन नंबर छपा होना चाहिए। नंबर न मिले तो बुकिंग की रक़म देने से पहले बिल्डर से लिखित में पूछें।
क्या सिर्फ़ रजिस्ट्री काफ़ी है?
पूरी तरह नहीं। रजिस्ट्री के बाद नगर निगम या भू-अभिलेख में दाख़िल-ख़ारिज (नाम चढ़वाना) कराएँ, और प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली और पानी के खाते अपने नाम करवाएँ। बेचते समय, लोन लेते समय या सेवाएँ लेते समय यही रिकॉर्ड काम आते हैं।
स्रोत
आख़िरी बार जाँचा गया: . फ़ीस और नियम बदलते रहते हैं और कई राज्य के हिसाब से अलग होते हैं। पैसे देने से पहले सरकारी साइट पर ज़रूर पक्का करें। यह आम जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं।