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माता-पिता को ठगी से बचाएँ ऑनलाइन

बुज़ुर्गों के साथ ज़्यादातर ठगी कुछ गिने-चुने तरीक़ों से होती है: पैसे "लेने" के लिए PIN, खाता "ठीक" करने के लिए कोई ऐप, या डराने वाली वीडियो कॉल। माता-पिता के साथ दस मिनट बैठिए, ये नियम साथ पढ़िए, WhatsApp की सेटिंग साथ में कीजिए, फ़्रिज कार्ड छापिए और क्विज़ खेलिए। सब कुछ इसी फ़ोन पर रहता है।

आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयास्रोत

कोई अजीब SMS या लिंक आया? अभी जाँचेंहमारे स्कैम चेकर में डालें। यह आपके फ़ोन पर ही चलता है।

1. UPI: छह नियम

  • पैसे लेने के लिए कभी PIN नहीं लगता

    UPI PIN सिर्फ़ पैसे भेजने के लिए है। कोई कहे कि "रिफ़ंड या इनाम लेने के लिए PIN डालिए", तो समझिए ठगी है।

  • पैसे लेने के लिए कभी QR स्कैन न करें

    QR स्कैन करना पैसे देने के लिए होता है। जो "ख़रीदार" आपको स्कैन करने के लिए QR भेजे, वह पैसे देना नहीं, लेना चाहता है।

  • "कलेक्ट रिक्वेस्ट" पैसे निकालती है

    UPI ऐप में पैसे की कोई रिक्वेस्ट आए और आप PIN डालकर मंज़ूर करें, तो पैसा आपके खाते से जाता है। जिस रिक्वेस्ट की उम्मीद नहीं थी, उसे मना कर दें।

  • पैसे भेजने से पहले नाम देखें

    नंबर डालने या QR स्कैन करने के बाद ऐप पाने वाले का नाम दिखाता है। अगर वह वही व्यक्ति या दुकान नहीं है, तो रुक जाएँ।

  • OTP, PIN, CVV: किसी को न बताएँ

    न बैंक को, न "कस्टमर केयर" को, न डिलीवरी वाले को। बैंक कर्मचारी इन्हें कभी नहीं माँगते (RBI)।

  • UPI Lite में PIN नहीं लगता

    UPI Lite फ़ोन में एक छोटा वॉलेट है जिससे छोटे भुगतान बिना PIN के होते हैं। इसमें थोड़ा ही बैलेंस रखें और फ़ोन पर स्क्रीन लॉक ज़रूर लगाएँ।

2. OTP, स्क्रीन शेयरिंग और डराने वाली कॉल

  • किसी के कहने पर कोई ऐप न डालें

    AnyDesk, TeamViewer, QuickSupport जैसे "स्क्रीन शेयरिंग" ऐप से फ़ोन करने वाला आपकी स्क्रीन देख लेता है, हर OTP भी। किसी बैंक को इनकी ज़रूरत नहीं।

  • "आपका KYC ख़त्म हो गया" एक जाल है

    जो मैसेज आज ही खाता बंद होने की धमकी देकर लिंक भेजे, वह नक़ली है। KYC सिर्फ़ ब्रांच में या बैंक के अपने ऐप में अपडेट करें।

  • Google पर मिले कस्टमर केयर नंबर नक़ली हो सकते हैं

    ठग अपने नंबर इंटरनेट पर डाल देते हैं। नंबर कार्ड के पीछे, पासबुक या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से ही लें।

  • "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कुछ नहीं होता

    पुलिस, CBI, ED, कस्टम या जज कभी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तारी या पूछताछ नहीं करते और पैसे भेजने को नहीं कहते। आप फ़ोन काट सकते हैं। फिर 1930 पर कॉल करें।

  • OTP आपके पैसे की चाबी है

    OTP वाला मैसेज पूरा पढ़ें: उसमें लिखा होता है कि किस काम का है। उसमें "पेमेंट" या "ट्रांसफ़र" लिखा हो और आप भुगतान नहीं कर रहे, तो किसी को न बताएँ।

  • डर या जल्दबाज़ी हो तो पहले घरवालों को फ़ोन करें

    ठग जल्दी करवाते हैं और बात छिपाने को कहते हैं। असली बैंक या अधिकारी तब तक रुक सकता है जब तक आप बेटे या बेटी को फ़ोन करें।

3. WhatsApp प्राइवेसी, क़दम दर क़दम

4. शिकायत कहाँ करें

  • ठगी में पैसा गया

    तुरंत 1930 पर कॉल करें, हो सके तो पहले घंटे में, या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें।

    1930 पर कॉल करें
  • ऑनलाइन शिकायत

    cybercrime.gov.in पर पैसों की ठगी और दूसरे साइबर अपराध की शिकायत होती है।

    cybercrime.gov.in खोलें
  • ठगी वाली कॉल, SMS या WhatsApp, पैसा नहीं गया

    दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल पर चक्षु में शिकायत करें।

    चक्षु खोलें
  • फ़ोन गुम या चोरी

    पुलिस में शिकायत के बाद CEIR पर फ़ोन ब्लॉक करें ताकि उसका इस्तेमाल न हो सके। ऑपरेटर से SIM भी बंद करवाएँ।

    CEIR पर ब्लॉक करें
  • कार्ड या UPI का ग़लत इस्तेमाल

    बैंक की अपनी हेल्पलाइन (कार्ड के पीछे या पासबुक में) पर कॉल करके कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग बंद करवाएँ। शिकायत नंबर ज़रूर लें।

    बैंक का नंबर कार्ड में सेव करें

5. फ़्रिज कार्ड

ज़रूरी नहीं। सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में सेव होता है, कहीं भेजा नहीं जाता।

रुकें। सोचें। घरवालों को फ़ोन करें।

  • OTP या UPI PIN किसी को न बताएँ। बैंक को भी नहीं।
  • पैसे लेने के लिए न PIN लगता है, न QR स्कैन।
  • पुलिस या CBI वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं करती।
  • फ़ोन करने वाले के कहने पर कोई ऐप न डालें।
  • डर या जल्दी लगे? फ़ोन काटें, पहले घरवालों को फ़ोन करें।

6. पाँच मिनट का क्विज़

10 असली हालात, 5 मिनट। चुनें कि आप क्या करेंगे; हर जवाब के साथ वजह भी बताई गई है।

यह किट कैसे इस्तेमाल करें

  • नियम साथ बैठकर धीरे-धीरे ज़ोर से पढ़ें। पढ़ने में दिक़्क़त हो तो "सुनें" दबाएँ।
  • WhatsApp के क़दम माता-पिता के अपने फ़ोन पर उनके सामने करें, ताकि वे ख़ुद दोबारा कर सकें।
  • अपना नाम, नंबर और उनके बैंक की हेल्पलाइन भरें, फिर फ़्रिज कार्ड प्रिंट करें या PDF सेव करें। यह जानकारी सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है।
  • क्विज़ साथ में खेलें। एक महीने बाद फिर खेलें: सबसे अच्छा स्कोर इसी फ़ोन में सेव रहता है।

लोग पूछते हैं

क्या पैसे लेने के लिए UPI PIN डालना पड़ता है?

कभी नहीं। UPI PIN सिर्फ़ पैसे भेजने के लिए होता है। जो कोई पैसे "लेने" के लिए PIN डालने या QR स्कैन करने को कहे, वह आपसे पैसे निकलवाना चाहता है।

क्या पुलिस या CBI वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार कर सकती है?

नहीं। भारतीय क़ानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कुछ नहीं है। पुलिस, CBI, ED या कस्टम कभी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ़्तारी नहीं करते और पैसे नहीं माँगते। फ़ोन काटें और 1930 पर कॉल करें।

ठगी में पैसे चले जाएँ तो तुरंत क्या करें?

तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें, फिर बैंक की हेल्पलाइन पर कार्ड या UPI बंद करवाएँ। जितनी जल्दी शिकायत, पैसा रुकने की उतनी ज़्यादा उम्मीद।

पैसा नहीं गया, पर ठगी वाला कॉल या SMS आया तो कहाँ बताएँ?

संचार साथी पोर्टल पर चक्षु (sancharsaathi.gov.in/sfc) पर। वहाँ संदिग्ध कॉल, SMS और WhatsApp मैसेज की शिकायत होती है।

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