हिंसा के कई रूप
शारीरिक, यौन, मौखिक और भावनात्मक, और आर्थिक हिंसा (आपकी तनख़्वाह ले लेना, खाने या किराए का पैसा रोकना, आपका सामान बेचना)। दहेज के लिए सताना भी।
घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, धारा 3अपने अधिकार जानें
अभी ख़तरे में हैं तो 112 मिलाएँ। हिंसा सिर्फ़ मारपीट नहीं: धमकी, अपमान, ज़बरदस्ती संबंध, और पैसे या घर से वंचित रखना भी हिंसा है। क़ानून जल्दी मिलने वाली सुरक्षा और घर में रहने का अधिकार देता है।
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ख़तरे में 181 (महिला हेल्पलाइन) या 112 मिलाएँ। ज़िले का वन स्टॉप सेंटर (सखी) एक ही जगह आश्रय, इलाज, काउंसलिंग और क़ानूनी मदद देता है। संरक्षण अधिकारी घरेलू घटना रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट को आवेदन में मदद करता है, जिससे संरक्षण आदेश, निवास आदेश (साझा घर से आपको निकाला नहीं जा सकता) और ख़र्च के लिए पैसा मिल सकता है। पुलिस शिकायत भी कर सकती हैं।
शारीरिक, यौन, मौखिक और भावनात्मक, और आर्थिक हिंसा (आपकी तनख़्वाह ले लेना, खाने या किराए का पैसा रोकना, आपका सामान बेचना)। दहेज के लिए सताना भी।
घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, धारा 3वह महिला जो हिंसा करने वाले के साथ साझा घर में रहती है या रही है, शादी, शादी जैसे रिश्ते (लिव-इन), ख़ून या गोद के रिश्ते में: पत्नी, साथी, माँ, बहन, बेटी, विधवा।
धारा 2(a), 2(f)आपको क़ानूनी प्रक्रिया के बिना साझा घर से नहीं निकाला जा सकता, चाहे उसमें आपका हिस्सा हो या न हो।
धारा 17, 19संरक्षण आदेश (हिंसा और संपर्क बंद), निवास आदेश, आर्थिक राहत (ख़र्च, कमाई का नुकसान, इलाज, भरण-पोषण), बच्चों की अस्थायी कस्टडी, और मुआवज़ा। अंतरिम आदेश जल्दी, दूसरे पक्ष को सुने बिना भी हो सकते हैं।
धारा 18 से 23आवेदन के आम तौर पर 3 दिन में पहली सुनवाई, और पहली सुनवाई के 60 दिन में फ़ैसला होना चाहिए।
धारा 12(4), 12(5)पति या रिश्तेदारों की क्रूरता BNS 85 (पुरानी IPC 498A) में अपराध है। दहेज मृत्यु BNS 80 है। संरक्षण आदेश तोड़ना अलग अपराध है।
BNS 85, 80; घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 31सुरक्षित जगह जाएँ: पड़ोसी, रिश्तेदार या नज़दीकी थाना।
181 चौबीसों घंटे मदद से जोड़ता है। ज़िले का वन स्टॉप सेंटर (सखी) आश्रय, इलाज, काउंसलिंग और क़ानूनी मदद मुफ़्त देता है।
हर ज़िले में होते हैं (अक्सर महिला एवं बाल विकास कार्यालय में)। वे घरेलू घटना रिपोर्ट लिखने और मजिस्ट्रेट तक पहुँचाने में मदद करते हैं।
जो आदेश चाहिए वह माँगें: संरक्षण, निवास, पैसा, कस्टडी। मुफ़्त क़ानूनी सहायता (15100) वकील दे सकती है।
पहचान पत्र, बैंक और संपत्ति के काग़ज़ों की कॉपी, दवाइयाँ, चार्ज फ़ोन, कुछ नक़द और ज़रूरी नंबर, किसी भरोसेमंद व्यक्ति के पास।
नए आपराधिक क़ानून 1 जुलाई 2024 से लागू हैं। पुराने मामले पुरानी धाराओं में चलते रहेंगे।
| पुरानी (IPC/CrPC) | अब (BNS/BNSS) | विषय |
|---|---|---|
| IPC 498A | BNS 85, 86 | पति या रिश्तेदारों की क्रूरता |
| IPC 304B | BNS 80 | दहेज मृत्यु |
| IPC 354A | BNS 75 | यौन उत्पीड़न |
यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। क़ानून और राज्य के नियम बदलते रहते हैं; आधिकारिक स्रोत देखें या वकील से पूछें। मुफ़्त क़ानूनी सहायता: NALSA 15100 मिलाएँ या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ।
नहीं। घरेलू हिंसा अधिनियम दीवानी उपाय है: आप संरक्षण अधिकारी या वकील के ज़रिए बिना आपराधिक केस के मजिस्ट्रेट जा सकती हैं। दोनों भी कर सकती हैं।
हाँ। क़ानून उन महिलाओं पर भी लागू है जो साझा घर में रह चुकी हैं, और मजिस्ट्रेट आपको घर वापस रखने या दूसरी जगह का किराया देने का आदेश दे सकते हैं।
आप कहें तो कार्यवाही बंद कमरे में हो सकती है। हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर आपकी जानकारी गोपनीय रखते हैं।
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