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घरेलू हिंसा: मदद का रास्ता

अभी ख़तरे में हैं तो 112 मिलाएँ। हिंसा सिर्फ़ मारपीट नहीं: धमकी, अपमान, ज़बरदस्ती संबंध, और पैसे या घर से वंचित रखना भी हिंसा है। क़ानून जल्दी मिलने वाली सुरक्षा और घर में रहने का अधिकार देता है।

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30 सेकंड में

ख़तरे में 181 (महिला हेल्पलाइन) या 112 मिलाएँ। ज़िले का वन स्टॉप सेंटर (सखी) एक ही जगह आश्रय, इलाज, काउंसलिंग और क़ानूनी मदद देता है। संरक्षण अधिकारी घरेलू घटना रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट को आवेदन में मदद करता है, जिससे संरक्षण आदेश, निवास आदेश (साझा घर से आपको निकाला नहीं जा सकता) और ख़र्च के लिए पैसा मिल सकता है। पुलिस शिकायत भी कर सकती हैं।

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आपके अधिकार

हिंसा के कई रूप

शारीरिक, यौन, मौखिक और भावनात्मक, और आर्थिक हिंसा (आपकी तनख़्वाह ले लेना, खाने या किराए का पैसा रोकना, आपका सामान बेचना)। दहेज के लिए सताना भी।

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, धारा 3

किसे सुरक्षा मिलती है

वह महिला जो हिंसा करने वाले के साथ साझा घर में रहती है या रही है, शादी, शादी जैसे रिश्ते (लिव-इन), ख़ून या गोद के रिश्ते में: पत्नी, साथी, माँ, बहन, बेटी, विधवा।

धारा 2(a), 2(f)

साझा घर में रहने का अधिकार

आपको क़ानूनी प्रक्रिया के बिना साझा घर से नहीं निकाला जा सकता, चाहे उसमें आपका हिस्सा हो या न हो।

धारा 17, 19

मजिस्ट्रेट के आदेश

संरक्षण आदेश (हिंसा और संपर्क बंद), निवास आदेश, आर्थिक राहत (ख़र्च, कमाई का नुकसान, इलाज, भरण-पोषण), बच्चों की अस्थायी कस्टडी, और मुआवज़ा। अंतरिम आदेश जल्दी, दूसरे पक्ष को सुने बिना भी हो सकते हैं।

धारा 18 से 23

समय सीमा

आवेदन के आम तौर पर 3 दिन में पहली सुनवाई, और पहली सुनवाई के 60 दिन में फ़ैसला होना चाहिए।

धारा 12(4), 12(5)

आपराधिक क़ानून भी

पति या रिश्तेदारों की क्रूरता BNS 85 (पुरानी IPC 498A) में अपराध है। दहेज मृत्यु BNS 80 है। संरक्षण आदेश तोड़ना अलग अपराध है।

BNS 85, 80; घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 31

क्या करें, कदम दर कदम

  1. अभी ख़तरा: 112 मिलाएँ

    सुरक्षित जगह जाएँ: पड़ोसी, रिश्तेदार या नज़दीकी थाना।

  2. 181 मिलाएँ या वन स्टॉप सेंटर जाएँ

    181 चौबीसों घंटे मदद से जोड़ता है। ज़िले का वन स्टॉप सेंटर (सखी) आश्रय, इलाज, काउंसलिंग और क़ानूनी मदद मुफ़्त देता है।

  3. संरक्षण अधिकारी से मिलें

    हर ज़िले में होते हैं (अक्सर महिला एवं बाल विकास कार्यालय में)। वे घरेलू घटना रिपोर्ट लिखने और मजिस्ट्रेट तक पहुँचाने में मदद करते हैं।

  4. मजिस्ट्रेट को आवेदन

    जो आदेश चाहिए वह माँगें: संरक्षण, निवास, पैसा, कस्टडी। मुफ़्त क़ानूनी सहायता (15100) वकील दे सकती है।

  5. एक छोटी सुरक्षा किट रखें

    पहचान पत्र, बैंक और संपत्ति के काग़ज़ों की कॉपी, दवाइयाँ, चार्ज फ़ोन, कुछ नक़द और ज़रूरी नंबर, किसी भरोसेमंद व्यक्ति के पास।

काम आने वाले पत्र और टूल

पुरानी धारा से नई धारा

नए आपराधिक क़ानून 1 जुलाई 2024 से लागू हैं। पुराने मामले पुरानी धाराओं में चलते रहेंगे।

पुरानी (IPC/CrPC)अब (BNS/BNSS)विषय
IPC 498ABNS 85, 86पति या रिश्तेदारों की क्रूरता
IPC 304BBNS 80दहेज मृत्यु
IPC 354ABNS 75यौन उत्पीड़न

यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। क़ानून और राज्य के नियम बदलते रहते हैं; आधिकारिक स्रोत देखें या वकील से पूछें। मुफ़्त क़ानूनी सहायता: NALSA 15100 मिलाएँ या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ।

लोग पूछते हैं

क्या सुरक्षा के लिए पुलिस केस ज़रूरी है?

नहीं। घरेलू हिंसा अधिनियम दीवानी उपाय है: आप संरक्षण अधिकारी या वकील के ज़रिए बिना आपराधिक केस के मजिस्ट्रेट जा सकती हैं। दोनों भी कर सकती हैं।

घर छोड़ चुकी हूँ, क्या फिर भी मदद मिलेगी?

हाँ। क़ानून उन महिलाओं पर भी लागू है जो साझा घर में रह चुकी हैं, और मजिस्ट्रेट आपको घर वापस रखने या दूसरी जगह का किराया देने का आदेश दे सकते हैं।

क्या मेरी जानकारी गोपनीय रहेगी?

आप कहें तो कार्यवाही बंद कमरे में हो सकती है। हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर आपकी जानकारी गोपनीय रखते हैं।

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