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अपने अधिकार जानें

गिरफ़्तारी के समय अधिकार

गिरफ़्तारी सज़ा नहीं है। क़ानून पुलिस के गिरफ़्तार करने और रोककर रखने पर सीमा लगाता है, और परिवार को साफ़ अधिकार देता है। ज़रूरत से पहले जान लें।

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30 सेकंड में

व्यक्ति को बताना होगा कि उसे क्यों गिरफ़्तार किया गया, और ज़मानती अपराध हो तो ज़मानत के बारे में भी। पुलिस को किसी रिश्तेदार या दोस्त को सूचना देनी होगी, गवाह के हस्ताक्षर वाला गिरफ़्तारी मेमो बनाना होगा, पूछताछ में वकील से मिलने देना होगा, मेडिकल जाँच करानी होगी और 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा। 7 साल तक की सज़ा वाले अपराधों में अक्सर गिरफ़्तारी की जगह हाज़िर होने का नोटिस देना होता है।

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आपके अधिकार

गिरफ़्तारी की जगह नोटिस

जहाँ गिरफ़्तारी ज़रूरी न हो, पुलिस को हाज़िर होने का नोटिस देना होगा। नोटिस का पालन करने पर उस अपराध में गिरफ़्तारी नहीं होनी चाहिए, जब तक अधिकारी कारण लिखित में दर्ज न करे। 3 साल से कम सज़ा वाले अपराध में अशक्त या 60 साल से ज़्यादा उम्र के व्यक्ति को DSP की अनुमति के बिना गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता।

BNSS 35(3) से 35(7)

अधिकारी का नाम और गिरफ़्तारी मेमो

अधिकारी को साफ़ दिखने वाली नेमप्लेट लगानी होगी और गिरफ़्तारी मेमो बनाना होगा, जिस पर परिवार के सदस्य या मोहल्ले के व्यक्ति के गवाह के रूप में और गिरफ़्तार व्यक्ति के हस्ताक्षर हों।

BNSS 36

गिरफ़्तारी का कारण और ज़मानत

अपराध का पूरा ब्योरा तुरंत बताना होगा। ज़मानती अपराध में यह भी बताना होगा कि ज़मानत पर छूट सकते हैं।

BNSS 47; संविधान अनुच्छेद 22(1)

किसी को बताना ज़रूरी

पुलिस को व्यक्ति के बताए रिश्तेदार या दोस्त और ज़िले के नामित अधिकारी को गिरफ़्तारी और रखे जाने की जगह की सूचना देनी होगी।

BNSS 48

पूछताछ में वकील

गिरफ़्तार व्यक्ति पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिल सकता है, पूरी पूछताछ में साथ नहीं।

BNSS 38

मेडिकल जाँच

गिरफ़्तारी के बाद जल्द ही मेडिकल अधिकारी जाँच करता है।

BNSS 53

24 घंटे में मजिस्ट्रेट

मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना किसी को 24 घंटे से ज़्यादा (यात्रा का समय छोड़कर) नहीं रोका जा सकता।

BNSS 58; अनुच्छेद 22(2)

महिलाएँ

असाधारण स्थिति छोड़कर किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ़्तार नहीं किया जाता, और तब भी महिला अधिकारी के ज़रिए मजिस्ट्रेट की पहले से अनुमति लेकर। पुरुष अधिकारी गिरफ़्तारी के लिए महिला को छुए नहीं।

BNSS 43(1), 43(5)

क्या करें, कदम दर कदम

  1. शांत रहें और कारण पूछें

    अधिकारी का नाम, थाना और अपराध पूछें। शारीरिक विरोध न करें।

  2. हस्ताक्षर से पहले मेमो पढ़ें

    तारीख़, समय और जगह जाँचें। परिवार को सूचना देने को कहें और लिखें कि किसे बताया गया।

  3. वकील या मुफ़्त क़ानूनी सहायता

    मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 (NALSA) मिलाएँ। हर थाने में क़ानूनी सहायता नंबर और नामित अधिकारी का ब्योरा लगा होना चाहिए।

  4. ज़मानती अपराध? थाने पर ही ज़मानत माँगें

    ज़मानती अपराध में ज़मानत अधिकार है। ज़मानतदार और ज़मानत बॉन्ड का इंतज़ाम करें।

  5. 24 घंटे पर नज़र रखें

    गिरफ़्तारी का समय लिख लें। 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी ज़रूरी है, जहाँ वकील पुलिस हिरासत का विरोध और ज़मानत की माँग कर सकता है।

काम आने वाले पत्र और टूल

पुरानी धारा से नई धारा

नए आपराधिक क़ानून 1 जुलाई 2024 से लागू हैं। पुराने मामले पुरानी धाराओं में चलते रहेंगे।

पुरानी (IPC/CrPC)अब (BNS/BNSS)विषय
CrPC 41BNSS 35बिना वारंट गिरफ़्तारी
CrPC 41ABNSS 35(3)हाज़िर होने का नोटिस
CrPC 41BBNSS 36गिरफ़्तारी मेमो, अधिकारी का नाम
CrPC 41DBNSS 38वकील से मिलना
CrPC 46BNSS 43गिरफ़्तारी का तरीका; महिलाएँ
CrPC 50BNSS 47गिरफ़्तारी का कारण, ज़मानत
CrPC 50ABNSS 48रिश्तेदार को सूचना
CrPC 57BNSS 5824 घंटे में मजिस्ट्रेट
CrPC 167BNSS 187रिमांड और हिरासत

यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। क़ानून और राज्य के नियम बदलते रहते हैं; आधिकारिक स्रोत देखें या वकील से पूछें। मुफ़्त क़ानूनी सहायता: NALSA 15100 मिलाएँ या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ।

लोग पूछते हैं

पुलिस हिरासत कितने दिन तक हो सकती है?

मजिस्ट्रेट कुल 15 दिन तक पुलिस हिरासत दे सकते हैं, एक साथ या हिस्सों में, अपराध के हिसाब से हिरासत के पहले 40 या 60 दिनों के अंदर (BNSS 187)। बाकी न्यायिक हिरासत होती है।

क्या हर सवाल का जवाब देना ज़रूरी है?

संविधान का अनुच्छेद 20(3) आपको अपने ख़िलाफ़ गवाह बनने के लिए मजबूर किए जाने से बचाता है। विस्तृत बयान देने से पहले वकील से बात करें।

मुफ़्त क़ानूनी सहायता किसे मिलती है?

हिरासत में हर व्यक्ति, महिलाएँ और बच्चे, SC/ST, दिव्यांग, औद्योगिक मज़दूर, आपदा पीड़ित, और राज्य की तय आय सीमा से कम आय वाले लोग। 15100 मिलाएँ या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ।

स्रोत

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