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सूचना का अधिकार (RTI)

कोई भी नागरिक सरकारी दफ़्तर से रिकॉर्ड माँग सकता है: फ़ाइल नोटिंग, नियम, ख़र्च, आवेदन की स्थिति। कारण बताने की ज़रूरत नहीं।

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30 सेकंड में

दफ़्तर के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को ₹10 फ़ीस के साथ लिखें (केंद्रीय दफ़्तर: rtionline.gov.in पर ऑनलाइन; राज्यों के अपने नियम और पोर्टल)। जवाब 30 दिन में, या किसी के जीवन या स्वतंत्रता का मामला हो तो 48 घंटे में। जवाब न मिले या अधूरा मिले? 30 दिन में प्रथम अपीलीय अधिकारी को पहली अपील, फिर 90 दिन में सूचना आयोग को दूसरी अपील।

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आपके अधिकार

कारण बताना ज़रूरी नहीं

आपको यह नहीं बताना कि जानकारी क्यों चाहिए, सिर्फ़ संपर्क का पता।

RTI अधिनियम 2005, धारा 6(2)

समय सीमा

जवाब 30 दिन में; जीवन या स्वतंत्रता का मामला हो तो 48 घंटे; सहायक PIO के ज़रिए दिया हो तो 5 दिन और।

धारा 7(1)

फ़ीस

केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरणों के लिए ₹10। गरीबी रेखा से नीचे वालों के लिए कोई फ़ीस नहीं। राज्य अपनी फ़ीस तय करते हैं।

धारा 7(5); RTI नियम 2012

पहली और दूसरी अपील

30 दिन में प्रथम अपीलीय अधिकारी को पहली अपील; 90 दिन में केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग को दूसरी अपील।

धारा 19(1), 19(3)

PIO पर जुर्माना

बिना कारण मना करने या देरी पर आयोग PIO पर ₹250 प्रति दिन, अधिकतम ₹25,000 जुर्माना लगा सकता है।

धारा 20

निजी जानकारी (2025 का बदलाव)

नवंबर 2025 से DPDP अधिनियम ने धारा 8(1)(j) बदल दी: जो जानकारी "निजी जानकारी से जुड़ी" हो उसे मना किया जा सकता है। इस बदलाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सार्वजनिक काम और अपने मामले के रिकॉर्ड माँगें; दूसरों का निजी ब्योरा न माँगें।

RTI धारा 8(1)(j), DPDP अधिनियम 2023 धारा 44(3) से संशोधित

क्या करें, कदम दर कदम

  1. सही दफ़्तर चुनें

    उस दफ़्तर को लिखें जिसके पास रिकॉर्ड है। ग़लत जगह भेजा तो उन्हें 5 दिन में ट्रांसफ़र करना होगा।

  2. साफ़, छोटे सवाल पूछें

    दस्तावेज़ों की कॉपी, फ़ाइल नोटिंग या स्थिति तारीख़ों के साथ माँगें। "क्यों" वाले सवाल न पूछें।

  3. ₹10 देकर भेजें

    केंद्रीय दफ़्तरों के लिए ऑनलाइन, या राज्य के नियम के हिसाब से IPO, DD या कोर्ट फ़ीस स्टांप के साथ डाक से। सबूत रखें।

  4. 30 दिन गिनें

    30वें दिन तक जवाब न आए तो उसे इनकार माना जाता है। पहली अपील करें (हमारा ड्राफ़्ट मदद करेगा)।

  5. दूसरी अपील

    पहली अपील से बात न बने तो 90 दिन में सूचना आयोग जाएँ।

काम आने वाले पत्र और टूल

यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। क़ानून और राज्य के नियम बदलते रहते हैं; आधिकारिक स्रोत देखें या वकील से पूछें। मुफ़्त क़ानूनी सहायता: NALSA 15100 मिलाएँ या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ।

लोग पूछते हैं

क्या राज्य के दफ़्तरों में ऑनलाइन RTI लगा सकते हैं?

कई राज्यों के अपने RTI पोर्टल हैं; कुछ सिर्फ़ डाक या हाथ से लेते हैं। rtionline.gov.in केंद्रीय मंत्रालयों और संस्थाओं के लिए है।

क्या निजी कंपनी से RTI में पूछ सकते हैं?

सीधे नहीं। कंपनी के बारे में जानकारी रखने वाले सरकारी नियामक (जैसे मंत्रालय या रेगुलेटर) से पूछ सकते हैं।

स्रोत

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