छह उपभोक्ता अधिकार
असुरक्षित सामान से सुरक्षा, जानकारी, चुनाव, सुनवाई, निवारण और उपभोक्ता जागरूकता का अधिकार।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, धारा 2(9)अपने अधिकार जानें
अगर आपने सामान या सेवा के पैसे दिए और ख़राबी, कमी, अनुचित व्यवहार या भ्रामक विज्ञापन मिला, तो क़ानून आपके साथ है, और वकील की ज़रूरत नहीं।
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पहले विक्रेता को लिखें। फिर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915, WhatsApp 8800001915) पर मुफ़्त शिकायत दर्ज करें। फिर भी न सुलझे तो ई-जागृति पर ऑनलाइन केस करें: ₹50 लाख तक ज़िला आयोग, ₹2 करोड़ तक राज्य, उससे ऊपर राष्ट्रीय। ₹5 लाख तक कोई फ़ीस नहीं। दो साल के अंदर दाख़िल करें।
असुरक्षित सामान से सुरक्षा, जानकारी, चुनाव, सुनवाई, निवारण और उपभोक्ता जागरूकता का अधिकार।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, धारा 2(9)सामान में ख़राबी, ख़राब या अधूरी सेवा, अनुचित व्यापार व्यवहार, ज़्यादा दाम और भ्रामक विज्ञापन, सब शिकायत के आधार हैं।
धारा 2(10), 2(11), 2(47)आप जहाँ रहते या काम करते हैं वहाँ केस कर सकते हैं, सिर्फ़ विक्रेता की जगह नहीं।
धारा 34(2)(d)ई-कॉमर्स कंपनियों में शिकायत अधिकारी होना चाहिए, 48 घंटे में शिकायत की पावती और एक महीने में समाधान।
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020कारण बनने के दो साल के अंदर केस करें।
धारा 69हमारा शिकायत पत्र इस्तेमाल करें। 15 दिन दें।
मुफ़्त, और वे अदालत से पहले कंपनी से बात करते हैं।
बैंक: RBI CMS। बीमा: बीमा भरोसा। उड़ान: एयरसेवा। ये मुफ़्त हैं।
छोटा नोटिस अक्सर मामला सुलझा देता है। हमारा उपभोक्ता क़ानूनी नोटिस ड्राफ़्ट आपका ब्योरा ले लेता है।
शिकायत और दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड करें। अपना केस ख़ुद लड़ सकते हैं।
यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। क़ानून और राज्य के नियम बदलते रहते हैं; आधिकारिक स्रोत देखें या वकील से पूछें। मुफ़्त क़ानूनी सहायता: NALSA 15100 मिलाएँ या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ।
₹5 लाख तक कोई फ़ीस नहीं। उससे ऊपर स्लैब के हिसाब से छोटी फ़ीस, ई-जागृति पर ऑनलाइन।
नहीं। क़ानून उन सामानों और सेवाओं पर लागू है जिनके पैसे दिए या देने का वादा किया। फ़ीस वाली सरकारी सेवाएँ गिनी जा सकती हैं; मुफ़्त वाली नहीं।
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