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गाँव · ग्रामीण सेवाएँ

ग्रामीण सेवाएँ, आपके अधिकार और सरकारी लिंक

अपना राज्य चुनें और ग्रामीण रोज़गार गारंटी की अधिसूचित दैनिक मज़दूरी देखें, फिर जॉब कार्ड, मज़दूरी, पंचायत योजना, ज़मीन के रिकॉर्ड और पीएम किसान के आसान क़दम देखें।

आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयास्रोत

आपके राज्य में ग्रामीण रोज़गार गारंटी की मज़दूरी

₹300 प्रति दिन

इस दर पर पूरे 125 दिन का काम मिले तो परिवार को साल में ₹37,500 बनेंगे। यह गारंटी की सबसे ऊँची सीमा है, काम का वादा नहीं।

S.O. 3518(E) में अधिसूचित, 1 जुलाई 2026 से लागू। किसी राज्य में ₹300 से कम नहीं। राजपत्र अधिसूचना (PDF)

ज़मीन का रिकॉर्ड: उत्तर प्रदेश

खतौनी (यूपी भूलेख)

ज़िला, तहसील, गाँव और खसरा, खाता या सर्वे नंबर से खोजें। कुछ पोर्टल कैप्चा भरवाते हैं: यह आम बात है और हम आपकी जगह यह नहीं करते।

सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
राज्य या UT₹ प्रति दिन
अंडमान और निकोबार (अंडमान ज़िला)348
अंडमान और निकोबार (निकोबार ज़िला)367
अरुणाचल प्रदेश300
असम300
आंध्र प्रदेश312
उत्तर प्रदेश300
उत्तराखंड300
ओडिशा300
कर्नाटक382
केरल401
गुजरात300
गोवा406
छत्तीसगढ़300
जम्मू और कश्मीर300
झारखंड300
तमिलनाडु345
तेलंगाना308
त्रिपुरा300
दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव340
नागालैंड300
पंजाब360
पश्चिम बंगाल300
पुडुचेरी347
बिहार300
मणिपुर300
मध्य प्रदेश300
महाराष्ट्र317
मिज़ोरम300
मेघालय300
राजस्थान300
लक्षद्वीप348
लद्दाख300
सिक्किम (बाकी सिक्किम)300
सिक्किम (ग्नाथांग, लाचुंग और लाचेन ग्राम पंचायत)450
हरियाणा409
हिमाचल प्रदेश (गैर-अनुसूचित क्षेत्र)300
हिमाचल प्रदेश (अनुसूचित क्षेत्र)375

ग्रामीण रोज़गार गारंटी (VB-G RAM G) में आपके अधिकार

  • हर ग्रामीण परिवार जो काम माँगे उसे साल में 125 दिन तक अकुशल काम मिल सकता है (MGNREGA में 100 दिन था)।
  • ग्राम पंचायत में लिखकर काम माँगें और तारीख़ वाली रसीद लें। 15 दिन में काम न मिले तो राज्य को बेरोज़गारी भत्ता देना होता है।
  • मज़दूरी सीधे आपके बैंक या डाकघर खाते में आती है, मस्टर रोल बंद होने के दो हफ़्ते के अंदर। देर होने पर हर दिन का मुआवज़ा मिलता है।
  • आपका राज्य बुवाई और कटाई के समय साल में 60 दिन तक काम रोक सकता है। तब 125 दिन बाकी साल में दिए जाते हैं।
  • महिला और पुरुष की मज़दूरी बराबर है। अधिसूचित दर पूरे दिन के काम की कम से कम मज़दूरी है।
  • हर काम की जाँच ग्राम सभा सोशल ऑडिट में करती है। वहाँ आप मस्टर रोल देख सकते हैं और सवाल पूछ सकते हैं।
  • ई-केवाईसी वाला MGNREGA जॉब कार्ड नया ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड बनने तक मान्य है। नए कार्ड के लिए किसी को पैसे न दें।

अपना जॉब कार्ड और किया हुआ काम देखें

  1. ग्रामीण विकास मंत्रालय का ग्रामीण रोज़गार पोर्टल खोलें और अपना राज्य चुनें।
  2. वित्त वर्ष, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनें।
  3. "जॉब कार्ड/रोज़गार रजिस्टर" खोलें और अपना नाम या जॉब कार्ड नंबर ढूँढें। कार्ड में हर काम, दिन और मज़दूरी दिखती है।
  4. काम किया पर दिन नहीं दिख रहे? ग्राम रोज़गार सहायक को बताएँ और ग्राम सभा में उठाएँ।

मज़दूरी के भुगतान का स्टेटस

  1. उसी पोर्टल पर पंचायत की रिपोर्ट खोलें और अपने काम का मस्टर रोल और फ़ंड ट्रांसफ़र ऑर्डर (FTO) देखें।
  2. अगर FTO पर साइन हो गए पर पैसा नहीं आया, तो खाता आधार से नहीं जुड़ा या नंबर ग़लत हो सकता है। बैंक या डाकघर से पूछें।
  3. मस्टर रोल बंद होने के दो हफ़्ते बाद भी पैसा नहीं: ब्लॉक ऑफ़िस में लिखकर देरी का मुआवज़ा माँगें।

आपकी पंचायत किस पर ख़र्च कर रही है? (ई-ग्रामस्वराज)

  1. ई-ग्रामस्वराज खोलें और "Planning" या "Reports" चुनें।
  2. राज्य, ज़िला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत और साल चुनें।
  3. ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में मंज़ूर काम और पैसा दिखता है। हुए भुगतान अकाउंटिंग रिपोर्ट में दिखते हैं।
  4. सवाल ग्राम सभा में ले जाएँ: योजना और हिसाब देखना आपका अधिकार है।

पीएम किसान किस्त का स्टेटस

  1. pmkisan.gov.in खोलें और "Know Your Status" चुनें।
  2. पंजीकरण नंबर डालें (या "Know your registration number" से मोबाइल या आधार से निकालें) और OTP डालें।
  3. तीन लाइनें देखें: ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार-बैंक सीडिंग। किस्त के लिए तीनों हाँ होनी चाहिए।
  4. लैंड सीडिंग में "नहीं" हो तो राज्य के कृषि या राजस्व दफ़्तर से ठीक होता है, ऑनलाइन नहीं।

नज़दीकी जन सेवा केंद्र (CSC) ढूँढें

  1. सरकारी CSC लोकेटर खोलें और राज्य, ज़िला, ब्लॉक या पिन से खोजें।
  2. जाने से पहले फ़ीस पूछें: कई सेवाएँ (ई-श्रम, पीएम किसान ई-केवाईसी) मुफ़्त हैं या उनकी छोटी तय फ़ीस है। रसीद माँगें।

ULPIN (भू-आधार): ज़मीन का 14 अक्षरों का नंबर

  • ULPIN (यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफ़िकेशन नंबर), जिसे भू-आधार भी कहते हैं, ज़मीन के एक प्लॉट का 14 अक्षरों का नंबर है, जो उसके कोनों के नक़्शे के निर्देशांक से बनता है।
  • इसे राज्य भूमि संसाधन विभाग के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइज़ेशन प्रोग्राम के तहत देता है। कई राज्य इसे भू-अभिलेख पर छापते हैं।
  • इससे मालिकाना हक़ नहीं बदलता। इससे एक प्लॉट रिकॉर्ड, बैंक और कोर्ट में आसानी से मिलता है और दो बार बेचना मुश्किल होता है।
  • ULPIN के लिए किसी को पैसे देने की ज़रूरत नहीं। अपने राज्य के भू-अभिलेख पोर्टल पर देखें।

यह कैसे काम करता है

  • मज़दूरी दरें भारत के राजपत्र की अधिसूचना S.O. 3518(E), 30 जून 2026 से ली गई हैं, जो 1 जुलाई 2026 से लागू है।
  • ग्रामीण रोज़गार गारंटी अब विकसित भारत रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAM G) के तहत है, जिसने 1 जुलाई 2026 को MGNREGA की जगह ली।
  • हम किसी सरकारी साइट से डेटा नहीं खींचते। हर जाँच सरकारी पोर्टल पर खुलती है, जहाँ आप अपना रिकॉर्ड देखते हैं।
  • आपका चुना राज्य सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में याद रहता है।

लोग पूछते हैं

क्या मनरेगा बंद हो गया?

1 जुलाई 2026 से MGNREGA की जगह VB-G RAM G अधिनियम आ गया है। काम नए अधिनियम में चलता है, साल में 125 दिन तक, और ई-केवाईसी वाले MGNREGA जॉब कार्ड नए ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड बनने तक मान्य हैं।

काम माँगा पर नहीं मिला। अब क्या करें?

लिखित माँग की तारीख़ वाली रसीद सँभालकर रखें। 15 दिन में काम न मिले तो राज्य को बेरोज़गारी भत्ता देना होता है। ब्लॉक के कार्यक्रम अधिकारी से कहें, फिर ग्राम सभा में उठाएँ।

मुझे अधिसूचित दर से कम मज़दूरी क्यों मिली?

भुगतान नापे गए काम पर निर्भर हो सकता है। मेज़रमेंट बुक और मस्टर रोल दिखाने को कहें; ग़लत लगे तो सोशल ऑडिट में उठाएँ।

मेरी ज़मीन का रिकॉर्ड कहाँ मिलेगा?

आपके राज्य के भू-अभिलेख पोर्टल पर (नीचे लिंक)। ज़िला, तहसील, गाँव और खसरा या खाता नंबर से खोजें। जो राज्य सूची में नहीं, उनके लिए भूमि संसाधन विभाग की साइट पर हर राज्य का लिंक है।

स्रोत

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