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मेरा · शिकायत

किससे शिकायत है? सही दरवाज़ा, सही क्रम में

नियामक आपकी शिकायत तभी लेते हैं जब कंपनी को पहले मौक़ा मिल चुका हो। क्षेत्र चुनें, पहला पत्र यहीं लिखें, और अगला दरवाज़ा खुलने के दिन हम आपको याद दिलाएँगे।

आख़िरी अपडेट: IndiaDigital संपादकों द्वारा जाँचा गयास्रोत

यह कैसे काम करता है

  • हर क्षेत्र की सीढ़ी दिखती है: पहले कंपनी, फिर नियामक या हेल्पलाइन, फिर उपभोक्ता आयोग। हर क़दम का इंतज़ार का समय नियामक के अपने नियमों से है।
  • "इस शिकायत को ट्रैक करें" दबाएँ और शिकायत की तारीख़ डालें। इंतज़ार पूरा होते ही मेरा में रिमाइंडर आ जाएगा, कूरियर ट्रैकर की तरह।
  • हम शिकायत, डॉकेट या खाता नंबर कभी सेव नहीं करते। उन्हें मिले हुए SMS या ईमेल में ही रहने दें; यहाँ सिर्फ़ छोटा नाम और तारीख़ें रहती हैं।
  • पहला पत्र हमारा उपभोक्ता शिकायत सहायक लिखता है और PDF आपके फ़ोन पर ही बनती है। आप जो लिखते हैं, कहीं नहीं भेजा जाता।

लोग पूछते हैं

क्या सीधे RBI लोकपाल के पास जा सकते हैं?

नहीं। पहले बैंक से शिकायत करें। बैंक मना करे, जवाब से संतोष न हो, या 30 दिन में जवाब न आए, तब cms.rbi.org.in पर RBI लोकपाल के पास जा सकते हैं। 1 जुलाई 2026 से इसके बाद सिर्फ़ 90 दिन मिलते हैं, इसलिए देर न करें।

बीमा क्लेम ठुकरा दिया गया। अब क्या करें?

बीमा कंपनी के शिकायत अधिकारी को लिखें, फिर IRDAI बीमा भरोसा पर दर्ज करें। कंपनी फिर भी मना करे या 30 दिन में जवाब न दे, तो बीमा लोकपाल ₹50 लाख तक के दावे मुफ़्त सुनता है।

ऑनलाइन ठगी में पैसा गया। क्या यही पेज सही है?

सबसे पहले, अभी 1930 पर कॉल करें, फिर cybercrime.gov.in पर शिकायत करें और बैंक को बताएँ। पहले घंटे में जल्दी सबसे ज़रूरी है।

क्या उपभोक्ता आयोग में वकील चाहिए?

नहीं। आप ई-जागृति पर ख़ुद दायर कर सकते हैं। ₹50 लाख तक के दावे ज़िला आयोग सुनता है। समस्या के 2 साल के भीतर दायर करें।

स्रोत

आखिरी बार जाँचा गया:

क्या इससे मदद मिली?
कुछ ग़लत लग रहा है?

कोई लिखा शब्द नहीं भेजा जाता, सिर्फ़ गिनती होती है। हमारे जाँचकर्ता नेटवर्क के विशेषज्ञ उस हिस्से को जाँचते हैं; सुधार सुधार सूची में दर्ज होते हैं।

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